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मथुरा : मैं होरी खेलूं रसभरी, प्रियाकान्तजु संग..

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वृंदावन (मथुरा)। ठाकुर श्रीप्रियाकान्तजु मंदिर प्रांगण में मंगलवार को ब्रज की सतरंगी होली खेली गई। टेसु के रंगों में भीगे श्रद्धालुओं ने होली के गीतों पर झूमते हुए कभी लड्डू-जलेबी का स्वाद चखा तो कभी राधा-कृष्ण के स्वरूपों के हाथों से पिटते दिखाई दिए।
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मंदिर अट्टालिका से देवकीनंदन महाराज ने हाइड्रोलिक पिचकारी से जैसे ही टेसु का सुगंधित रंग बरसाया, प्रांगण में मौजूद श्रद्धालु झूमकर नृत्य करने लगे। सतरंगी छटाओं के बीच श्रद्धालु तीन घंटे तक होली का आनंद लेते रहे।
प्रियाकान्तजु मंदिर पर ब्रज की होली के सातों रंग जीवंत हो उठे। ब्रज के गोप-ग्वालों के हास परिहास, रसिया से शुरू हुई होली की ठिठोली लठामार होली में बदल गई। राधा-कृष्ण के स्वरूपों ने श्रद्धालुओं के बीच जाकर लड्डू और जलेबी लुटाते हुए मीठी होली खेली। मुख्य मंच पर श्रद्धालुओं ने रंग-बिरंगे फूलों से फूलों की होली खेली तो वातावरण में पुष्प-पत्तियों की अनुपम छटा बन गई।
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मै होरी खेलूं रसभरी, प्रियाकान्तजु संग... फाग खेलन बरसाने आये, नटवर नंद किशोर.., जैसे होली गीतों पर देवकीनंदन महाराज ने श्रद्धालुओं पर गुलाल बरसाया। उड़त गुलाल, लाल भये बदरा...गीत पर नृत्य करते हुए श्रद्धालुओं ने लाल-गुलाबी-हरे गुलाल से आपस में भी खूब होली खेली। मंदिर की अट्टालिका से श्रद्धालुओं पर हाइड्रोलिक पिचकारी से टेसु का सुगंधित रंग बरसाया गया। देवकीनंदन महाराज जिधर भी पिचकारी से रंग फेंकते प्रांगण में मौजूद श्रद्धालु झूमकर नृत्य करने लगते।
इस मौके पर देवकीनंदन महाराज ने कहा कि सनातनी त्योहारों को पूरे धूमधाम और उत्साह से मनाना चाहिए। होली हमारे जीवन में उत्साह और उमंग के नए रंग भरती है। यह आपसी प्रेम का पर्व है, इसे बिना नशे और किसी को परेशान किए मनाना चाहिए। इस अवसर पर विश्व शांति सेवा चैरीटेबल ट्रस्ट के सचिव विजय शर्मा, धन्नु भइया, विष्णु शर्मा, ब्रजलाल सोनी, श्रीपाल जिंदल सहित सैकड़ों की तादाद में भक्त मौजूद थे।
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