पुष्प पंखुड़ी और भस्म श्रृंगार में चकलेश्वर महादेव।
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गोवर्धन (मथुरा)। गोवर्धन के प्राचीन चकलेश्वर मंदिर में महादेव का पुष्प पंखुड़ियों और भस्म का अलौकिक शृंगार किया गया। भस्म शृंगार के बीच विराजे महादेव की संध्या आरती में शिव भक्तों ने प्रभु के दर्शन कर मनौती मांगी।
चैत्र नवरात्र पर बुधवार की संध्या को गोवर्धन के प्राचीन चकलेश्वर महादेव मंदिर के सेवायत पुजारी हरदेव, पंकज व गणेश ने भोले भंडारी महादेव का विभिन्न प्रजातियों की पुष्प पंखुड़ियों के साथ भस्म आदि से शृंगार किया। भस्म शृंगार दर्शन के लिए कस्बा के लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सेवायत पंकज ने बताया चकलेश्वर महादेव के बारे में शास्त्रों और पुराणों में मिले उल्लेख के अनुसार द्वापर काल में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों द्वारा की जाने वाली इंद्र की पूजा को बंद करा दिया और ब्रज में पर्वत स्वरूप स्थित गिरि गोवर्धन महाराज की पूजा प्रारंभ कर दी।
इंद्र के कोप से बचाने के लिए कृष्ण ने मांगी थी मदद
इंद्र के कोप से ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने कैलाश पति भगवान शंकर से मदद मांगी और उनका आह्वान कर उन्हें ब्रज में बुलाया। शंकर जी ने ब्रज में आकर अपने त्रिशूल को ब्रजमंडल के उपाय चक्र के समान घुमाया और उसी से घनघोर वर्षा के जल को सुखा दिया। 7 दिन और 7 रात तक इंद्र वर्षा करते रहे और इधर शिव जी का त्रिशूल उसे सोखता रहा।