मथुरा। जनता की खून पसीने की कमाई को हड़पने वाले कल्पतरु ग्रुप के डायरेक्टर जयकिशन सिंह राणा की मौत पर सवालिया निशान लग रहा है।
बार के पूर्व सचिव साहब सिंह देशवार ने मौत की सीबीआई जांच की मांग की है। अधिवक्ता द्वारा तथाकथित मौत से कुछ समय पूर्व पुलिस द्वारा जयकिशन राणा को मुचलके पर छोड़ने संबंधी मामले को भी उन्होंने सीबीआई को भेजे पत्र में उठाया है।
कल्पतरु ग्रुप के चेयरमैन के खिलाफ पूरे देश में करीब १५० अभियोग पंजीकृत थे, जिनमें से करीब ५० मामले मथुरा में ही हैं। इन सभी मामलों का हवाला देते हुए अधिवक्ता साहब सिंह देशवार ने प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था को पत्र भेजा है।
पत्र में अधिवक्ता ने राणा पर फर्जी कंपनियां बनाकर अरबों रुपये हड़पने का आरोप लगाया है। बताया कि वर्ष २०१० से २०१५ तक जयकिशन राणा ने न केवल फर्जी कंपनियों को खोला बल्कि जनता को धन को दोगुना करने का लालच देकर फंसाया और अरबों रुपये की धोखाधड़ी की और जब रुपये वापस करने का समय आया तो वह परिवार सहित भूमिगत हो गया।
अधिवक्ता ने बताया है कि राणा की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न न्यायालयों से वारंट थे, इसके बावजूद मथुरा पुलिस ने धारा ४१ ए के तहत ५ अप्रैल २०२१ को उसे मुचलके पर छोड़ दिया। क्राइम ब्रांच ने यह काम भी जय किशन राणा के नोएडा स्थित आवास पर जाकर किया। फिर इसके बाद कोरोना काल चल रहे मृत्यु के तांडव का लाभ लेकर मृत्यु प्रमाणपत्र तक जारी करा दिया। उन्होंने पत्र में पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिस व्यक्ति पर १५० मुकदमे हों, कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट हो और पुलिस द्वारा इनाम घोषित, ऐसी परिस्थितियों में पुलिस द्वारा मुचलके पर छोड़ना पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान लगाता है।