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मथुरा: अक्षय तृतीया : बन रहा रोहिणी नक्षत्र और शोभन योग

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मथुरा। अक्षय तृतीया पर ठाकुरजी को भोग लगाने के लिए सत्तू खरीदते लोग। - फोटो : VRINDAVAN
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मथुरा। वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है लेकिन इस बार इस दिन बन रहे कई शुभ संयोग सोने पर सुहागा जैसे हैं।
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इस दिन रोहिणी नक्षत्र और शोभन योग रहेगा। इसके साथ ही सुख के प्रदाता शुक्र, चंद्र एवं सूर्य अपनी उच्च राशि में रहकर राजयोग का निर्माण करेंगे। वहीं गुरु के मीन राशि में एवं शनि के स्वयं के घर में होने से भी राजयोग बनेगा। अक्षय तृतीया पर ग्रहों की ऐसी युति काफी शुभ मानी गई है। इस दिन सोना, चांदी, घर, जमीन, दुकान, वाहन की खरीदारी करना भी शुभ रहता है।
दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर चतुर्वेदी का कहना है कि धर्म में विश्वास रखने वालों के लिए अक्षय तृतीया बेहद ही शुभ और महत्वपूर्ण दिन है। अक्षय शब्द का अर्थ होता है ‘जिसका कभी क्षय न हो या जिसका कभी नाश न हो’। ऐसे में मान्यता है कि व्यक्ति दान-पुण्य, परोपकारी कर्म करे तो शुभ फल प्राप्त होता है।
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ज्योतिषाचार्य आलोक गुप्ता बताते हैं कि इस बार अक्षय तृतीया 3 मई को है। इस दिन अबूझ मुहूर्त रहेगा, जिसमें इस दिन विवाह समेत कोई भी शुभ कार्य बिना पंचांग देखें किया जा सकता है। ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल गौड़ बताते हैं कि इस बार अक्षय तृतीया पर ग्रहों का ऐसा संयोग बना है जो इस दिन को और शुभ और प्रभावशाली बना रहा है। जो सुख, धन, वैभव और समृद्धि के लिए काफी शुभ होंगे।
अक्षय तृतीया का महत्व
- इसी तिथि को परशुराम व हयग्रीव का अवतार हुआ था।
- त्रेतायुग का प्रारंभ भी इसी तिथि को हुआ था।
- इस दिन श्री बद्रीनाथ जी के पट खुलते हैं।
- भगवान कृष्ण और सुदामा का मिलन हुआ था।
- महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखना शुरू किया था।
- बांकेबिहारी के चरण दर्शन अक्षय तृतीया को होते हैं।
ठाकुरजी को चंदन का लेप के साथ लगेगा सत्तू का भोग
वैशाख के महीने में गर्मी अपने चरम की ओर तेजी के साथ बढ़ने लगी है। आम आदमी व्याकुल है। पशु पक्षी भी बेचैन हो गए हैं। ऐसे में ठाकुरजी का गर्मी से बचाव करने के लिए भक्तों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
खासकर अक्षय तृतीया के मद्देनजर मंदिरों में होने वाले आयोजनों के लिए बाजार में खरीदारी हो रही है। बड़ी मात्रा में चंदन, सत्तू खरीदे जा रहा है।
तीन मई की अक्षय तृतीया है। इस दिन विभिन्न आयोजन मंदिरों में किए जाते हैं। इन आयोजनों के अनुसार चंदन, सत्तू, पंखा, सुराही, कुंजा, शर्बत आदि की बाजार में बिक्री हो रही है। लोग अपने घर पर मंदिरों के लिए गर्मी को देखते हुए ठाकुरजी की सेवा के लिए अनेक सामान खरीद रहे हैं। खासकर चंदन और सत्तू की खरीद की जा रही है। ठाकुरजी को चंदन का लेप के साथ सत्तू का भोग लगेगा।
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