असकुंडा घाट स्थित बड़ा गणेश का श्रीविग्रह।
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मथुरा। शहर के मध्य यमुना तट असकुंडा घाट पर प्राचीन बड़ा गणेश मंदिर सुशोभित है। यहां गणेश जी का करीब 6 फुट का आदमकद श्रीविग्रह है। सेवायत ने बताया कि 41 दिन का संकल्प लेकर नियमपूर्वक यहां दर्शन व पूजन करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है व मनोइच्छा पूर्ण होती है।
मंदिर सेवायत चंद्रशेखर गोस्वामी ने बताया कि वह अपने पुरखों की सातवीं पीढ़ी के रूप में गणेशजी के सेवायत हैं। उनकी वंश परंपरा में सातवीं पीढ़ी के पुरखे श्रीधर शास्त्री ने इस मंदिर में सेवा प्रारंभ की। उससे भी काफी समय पहले से यह मंदिर था। मथुरा संग्रहालय में मौजूद अंग्रेज कलेक्टर एफएस ग्राउस की पुस्तक में इसकी प्राचीनता का उल्लेख है। इसके अलावा चैतन्य महाप्रभु के ब्रज आगमन का जो नक्शा है उसमें विनायक तीर्थ के नाम से इस मंदिर का उल्लेख है। वहीं गौड़ीय संप्रदाय के ग्रंथों व पुस्तकों में इस मंदिर का उल्लेख है।
सेवायत ने बताया कि 5 वर्ष पूर्व नवदीप मायापुर पश्चिम बंगाल से चैतन्य महाप्रभु के अनुयायी यात्रियों का एक समूह अपनी यात्रा के दौरान उसी नक्शे के आधार पर खोजते हुए यहां दर्शन को आए थे उन्होंने ही अपने नक्शे में विनायक तीर्थ लिखा हुआ दिखाया, साथ ही उनके पास एक पुस्तक में बड़े गणेश का चित्र छपा था। इस मंदिर की प्राचीनता इस से भी लगाई जा सकती है कि मथुरा में वराह भगवान चार प्रमुख प्राचीन पौराणिक विग्रहों में से एक विग्रह इसी मंदिर में सुशोभित है। मथुरा की पंचकोसीय परिक्रमा के प्रमुख मंदिरों में है यह मंदिर है।