मथुरा। कुदरत के कहर और बाजार की बेरुखी ने किसानों को मुसीबत में डाल दिया है। पहले आलू के गिरते दामों ने किसानों को रुलाया और अब बेमौसम बारिश-ओलाें ने गेहूं की फसल को चौपट कर दिया है। कई क्षेत्रों में गेहूं की लगभग 80 फीसदी फसल बर्बाद हो चुकी है।
इस साल आलू की बंपर पैदावार हुई है। सही भाव नहीं मिलने के कारण किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है। ऐसे में बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में किसान अपना आलू कोल्ड स्टोर में रखने के लिए मजबूर हैं। वहीं गेहूं किसानों पर कटाई के समय कुदरत ने कहर बरपाया। बीते कई दिन से हो रही भारी बारिश व ओलाें के कारण गेहूं की खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई और कटी पड़ी फसल जलमग्न हो गई, जिससे दाना काला पड़ने और सड़ने की आशंका बढ़ गई है।
किसान नेताओं व ग्रामीणों के अनुसार जिलेभर में करीब 80 फीसदी गेहूं की फसल बर्बाद होने का अनुमान है जबकि अधिकारी अलग-अलग क्षेत्रों में 40 से 60 फीसदी फसल नष्ट होने का दावा कर रहे हैं। प्रत्येक तहसील में राजस्व व कृषि विभाग की टीम नुकसान का सर्वे करने में जुटी है। खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने किसानों को सतर्क रहने और कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी है। जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि सर्वे कार्य में टीमें जुटी हुई हैं। किसानों को नुकसान की भरपाई कराई जाएगी।
पिछली साल की तुलना में इस साल आलू के दाम गिरे
किसानों के अनुसार आलू को कोल्ड स्टोर में रखने का भाड़ा करीब 250 से 280 रुपये प्रति क्विंटल है। 2000 रुपये प्रति बीघा की बुवाई और 2500 रुपये प्रति बीघा की खुदाई व ढुलाई की लागत आई है। कुल खर्च करीब 10 हजार रुपये प्रति बीघा बैठता है। एक बीघा में 45 कट्टे आलू निकले हैं, जबकि भाव 250 से 350 रुपये प्रति कट्टे (50 किलोग्राम) के बीच साइज और वैरायटी के अनुसार चल रहा है। इस रेट से किसानों की लागत भी नहीं निकल रही है, जबकि पिछले साल 700 से 800 रुपये प्रति कट्टे का रेट था।
तेज हवाएं चलीं और छाए बादल
किसानों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। सोमवार शाम को अचानक मौसम से फिर बिगड़ गया। तेज हवा के साथ बादल छानेलगे। देर रात तक यही हाल रहा। मौसम विभाग ने मंगलवार और बुधवार को भी बारिश के आसार जताए हैं। गरज-चमक के साथ ओले गिरने की भी आशंका है।