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Mathura News: पैतृक गांव करहला पहुंचे महंत नृत्य गोपाल दास

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महंत नृत्य गोपाल दास का पूजन करते भक्त। 
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बरसाना (मथुरा)। जिन संत के संकल्प ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण की नींव रखी वही जब 14 वर्ष बाद अपने जन्मस्थान लौटे तो गांव करहला की गलियों से लेकर झूलबिहारी मंदिर तक भीड़ उमड़ पड़ी। ग्रामीणों ने समय गंवाए अपने लाडले संत के दर्शन को दौड़ लगा दी। मंदिर के द्वार पर कदम रखते ही महंत नृत्य गोपाल दास का स्वागत श्रद्धा में भीगी पलकों, फूलों और जय श्रीराम के उद्घोष से किया गया।
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महंत के गांव आगमन पर वर्षों से इंतजार कर रहे ग्रामीण, साधु-संत और महिलाओं ने दर्शन पाकर स्वयं को धन्य किया। लगभग 30 मिनट के प्रवचन के दौरान महंत ने कहा कि जन्मभूमि पर लौटना आत्मा को वहां ले जाता है जहां साधक और साधना में कोई भेद नहीं रहता। उन्होंने हाथ उठाकर ग्रामीणों को आशीर्वाद दिया तो लगा मानो आकाश भी झुक गया हो।
संत रामकुमार दास ने कहा कि हमारा सौभाग्य है महंत नृत्य गोपाल दास आज हमारे बीच विराजमान हैं। महंत के वाहन में बैठकर नारायण आश्रम वृंदावन रवाना होने तक ग्रामीणों की भीड़ साथ रही। इस मौके पर संत रामकुमार दास महाराज, रवि भारद्वाज, दूदू जादौन, सतीश खुशी, कृष्णा जादौन, राहुल फौजी, भरत पंडित आदि मौजूद रहे।
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गांव करहला में जन्मे नृत्य गोपाल दास
महंत नृत्य गोपाल दास बचपन से ही श्रद्धा और सज्जनता के प्रतीक रहे। 11 जून 1938 को गांव करहला गांव में जन्मे नृत्य गोपाल दास ने वर्ष 1953 में दसवीं पास की और मथुरा के एक कॉलेज में प्रवेश लिया। किशोरावस्था में ही आध्यात्मिक झुकाव उन्हें अयोध्या ले गया। वहां उन्होंने महंत राम मनोहर दास से दीक्षा ली और जीवन को धर्म तथा राष्ट्र चेतना के लिए समर्पित कर दिया। वाराणसी संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री की उपाधि प्राप्त करने के बाद वर्ष 1965 में मणिराम दास छावनी (छोटी छावनी) के महंत बने। वर्तमान में वे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के भी प्रमुख हैं।
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