सिद्धक्षेत्र चौरासी कृष्णानगर में आयोजित जम्बूस्वामी महामस्तकाभिषेक महोत्सव में सोमवार को सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया।
संत मुनिश्री 108 विहर्षसागर महाराज ने भगवान जम्बूस्वामी के जीवन चरित्र पर कहा कि ये वे भगवान हैं जिनका जीवन ही वैराग्यमय है।
वह विवाह के अगले दिन ही चार रानियों के साथ हुए वैवाहिक जीवन को त्याग कर वैराग्य की ओर बढ़ गए। 500 चोर जो राजमहल में चोरी करने के लिए आए थे, उन्होंने ने भी उनके वैराग्य पूर्ण संवाद को सुनकर जैनेश्वरी दीक्षा को अंगीकार (धारण) कर लिया।
जम्बूस्वामी ने 84 वर्ष की आयु में इस पावन भूमि (मथुरा चौरासी) से निर्वाण पद की प्राप्ति की। इसके बाद साधारण भूमि को विश्व में सिद्धक्षेत्र चौरासी के नाम से प्रसिद्ध किया गया। मुनिश्री ने कहा कि यह उत्तर भारत का एकमात्र सिद्धक्षेत्र है।
शाम को गुरुभक्ति के मधुर रसपान के बाद भगवान महावीर स्वामी के प्रथम आहार दात्री सती चन्दनबाला के जीवन चरित्र को मनोज शर्मा की टीम ने नाट्य के रूप में प्रस्तुत किया।
इस मौके पर ऋषण जैन, विनोद जैन फीरोजाबाद, पद्मचन्द जैन सहित विभिन्न शहरों से आए आए श्रावकों ने लगभग 1200 कलशों से श्रीजम्बूस्वामी का अभिषेक किया।
कार्यक्रम में अखिल भारतवर्षीय शास्त्री परिषद के अध्यक्ष डा. श्रेयांस जैन ने मंत्रोच्चारण, प्रदीप, पंडित जिनेन्द्र शास्त्री मौजूद रहे। संचालन मनोज जैन आगरा ने किया। इस दौरान सिद्धक्षेत्र के अध्यक्ष सेठ विजय कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।