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Mathura: वृंदावन में बने सिंहासन पर अमेरिका में विराजेंगे भगवान श्रीराधाकृष्ण, मनाया जाएगा जन्माष्टमी उत्सव

Sun, 20 Aug 2023 10:59 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

मथुरा के वृंदावन में बने सिंहासन पर भगवान श्रीराधाकृष्ण अमेरिका में विराजेंगे। इसके बाद जन्माष्टमी उत्सव मनाया जाएगा। इसे मूर्तिकार ईशान आचार्य ने बनाया है।
 
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वृंदावन के मूर्तिकार द्वारा बनाया गया ठाकुर जी का सिंहासन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तीर्थनगरी मथुरा में वृंदावन के जाने-माने मूर्तिकार ईशान आचार्य ने एक विशाल फाइबर का आकर्षक सिंहासन बनाया है। इस सिंहासन पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित इस्कॉन मंदिर में भगवान श्रीराधाकृष्ण विराजमान होंगे। यह सिंहासन सूरत से पानी के जहाज के जरिए अमेरिका पहुंचाया जाएगा।

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देश-विदेशों में अपनी जीवंत मूर्ति और चित्रकला के मामले में पहचान बनाने वाले ईशान आचार्य ने कैलिफोर्निया के इस्कॉन मंदिर के लिए 12 फुट चौड़ा और 20 फुट लंबा सिंहासन बनाया है। पिता राजेंद्र आचार्य के साथ चार माह की कड़ी मेहनत से तैयार हुआ। सिंहासन 200 किलो वजन का है। 

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मूर्तिकार ईशान ने बताया कि कैलिफोर्निया के इस्कॉन मंदिर प्रबंधन ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए भगवान राधाकृष्ण के श्रीविग्रहों को विराजित करने के लिए विशेष सिंहासन बनाने का ऑर्डर छह माह पूर्व दिया गया था। फाइबर के इस सिंहासन को मजबूती प्रदान करने के लिए वायर फ्रेम बनाया गया। इसे आकर्षक और कलात्मक आकार देने के लिए वायर फ्रेम के ऊपर चॉकलेट रंग की फाइबर लगाई गई। 

उन्होंने बताया कि सिंहासन को पानी के जहाज के जरिए अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर में पहुंचाया जाएगा। एक सप्ताह बाद वृंदावन से यह सिंहासन सूरत जाएगा। सूरत पोर्ट से पानी के जहाज के जरिए सिंहासन को अमेरिका ले जाया जाएगा। इसके लिए सिंहासन को पैक कर दिया गया है। इस विशाल एवं आकर्षक सिंहासन पर कैलिफोर्निया इस्कॉन मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव पर पहली बार भगवान राधाकृष्ण को विराजमान किया जाएगा। इसके बाद जन्माष्टमी उत्सव मनाया जाएगा।

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मूर्तिकार ईशान आचार्य ने बताया कि वह 17 साल की उम्र से मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं। उनके गुरु उनके पिता राजेंद्र आचार्य हैं। इन्होंने मूर्ति कला और चित्रकला सिखाई। उन्होंने पिछले 12 वर्ष में करीब 300 मूर्ति बनाई हैं। इनमें भगवान राधाकृष्ण, प्रभुपाद, चैतन्य महाप्रभु, निताईगौर और गायों की मूर्तियां बनाई हैं, आयरलैंड, अमेरिका, जर्मनी, फिजी आदि देशों में जा चुकी हैं।
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