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UP News: चौमुहां में बैठकर श्रीकृष्ण नाम भजते हैं श्रीब्रह्मा जी, भाद्रपद की पूर्णिमा को लगता है विशाल मेला

Tue, 17 Sep 2024 06:05 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

तीर्थनगरी मथुरा के चौमुहां में बैठकर श्रीब्रह्मा जी, श्रीकृष्ण नाम भजते हैं। यहां भाद्रपद की पूर्णिमा को विशाल मेला लगता है। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 
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चौमुहां में ब्रह्माजी का मंदिर - फोटो : संवाद
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विस्तार
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तीर्थनगरी मथुरा के चौमुहां में बैठकर श्रीब्रह्मा जी, श्रीकृष्ण नाम भजते हैं। ऐसी मान्यता है। राजस्थान के पुष्कर के अलावा चौमुहां में ब्रह्मा जी का मंदिर बना है। यहां दूर-दराज से श्रद्धालु पूजा अर्चना करने आते हैं। भादो मास की पूर्णिमा को चौमुंहा स्थित ब्रह्मझाडी में ब्रह्मा जी का मेला लगता है। 

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चौमुहां में ब्रह्मा जी द्वारा कृष्ण नाम भजने की भी एक मान्यता है। चिंतामणि शास्त्री ने बताया कि मान्यता अनुसार आकाश मार्ग से गुजरने के दौरान एक बार ब्रह्माजी ने पृथ्वीलोक पर श्रीकृष्ण को ग्वाल बाल के साथ गाय चराते देखा। श्रीकृष्ण ग्वालवालों के साथ भोजन कर रहे थे। उनका झूठा भी खा रहे थे। यह देख ब्रह्माजी ने उनके ईश्वर होने पर संदेह किया। 

ब्रह्माजी ने श्रीकृष्ण की परीक्षा लेने के लिए उनकी गाय और बछड़े झाड़ी के छिपा दिए। लौटकर देखा तो श्रीकृष्ण उन्ही गायों को चरा रहे थे, फिर गुफा में गए तो वहां सभी गाय-बछड़े बंधे मिले। इस पर ब्रह्माजी ने भगवान कृष्ण की लीला जानी और उनसे माफी मांगी। अपनी गलती का पश्चाताप करने के लिए ब्रह्माजी ने इसी झाड़ी में कृष्ण नाम भजा, जो बाद में ब्रह्मझाडी के नाम से विख्यात हुई। 
 

कालांतर में यहां जमीन से एक प्रतिमा मिली उसे निकाल कर यहां ब्रह्माजी के मंदिर का निर्माण कराया गया। अभिमन्यु के वंशज बज्रनाव ने चौमुंहा को बसाया था। जिसका पहले नाम चौमुख व ब्रह्मा जी के चार मुख होने के कारण चौमुहां नाम पड़ा। ब्रह्मा जी के मंदिर न होने के पीछे एक श्राप माना जाता है। एक बार भगवान विष्णु व भगवान ब्रह्मा में बड़ा होने के लिए बहस हो गई। 
 

ब्रह्मा जी कहते मैं बड़ा हूं, और विष्णु जी अपने को बड़ा बताने लगे। बहस के दौरान ही वहां शिव पहुंच गए। उन्होंने विवाद को समझ कर कहा कि मैं अपने शरीर को बढ़ाता हूं, जो इसका पता (थाह) लगाकर आएगा, वही बड़ा माना जाएगा। विष्णु भगवान सिर की (आकाश) ओर गए और ब्रह्मा जी पैर यानी पाताल की ओर गए। 
 

विष्णु जी खोज लगाते लगाते लौट आए। मगर, शिव के सिर का पर पता नहीं लगा पाए, आकर कहा कि वे पता नहीं लगा पाए। ब्रह्मा जी ने आकर झूठ बोल दिया कि वे थाह ले आए हैं। इस पर भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के ऊपर आकाश की ओर वाले मुख को काट दिया। उनको श्राप दिया कि तुम्हारी पूजा नहीं होगी। श्राप के चलते ही उनकी पूजा नहीं होती और उनके मंदिर भी नहीं बने। चौमुहां के मंदिर में भी काफी देर से आरती होती हैं।
 
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पूजा अर्चना के साथ शुरू हो जाएगा मेला

बुधवार सुबह ब्रह्मा जी की पूजा के बाद मेला शुरू होगा। महंत धनीराम द्वारा पूजा अर्चना के साथ अनुष्ठान किया जाएगा। यजमान जॉली वार्ष्णेय परिवार सहित पूजा अर्चना करेंगे। दोपहर तीन बजे से कुश्ती दंगल का आयोजन होगा। रात्रि के समय पथवारी मंदिर पर रसिया दंगल होगा।
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