मथुरा। विकास खंड बलदेव की ग्राम पंचायत किशनपुर में स्ट्रीट लाइटों की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया है। लाइटों पर पड़ी तारीख ने ही पूरे फर्जीवाड़ो की पोल खोल दी। जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास चंद्र ने जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट भेजी है।
किशनपुर निवासी अधिवक्ता नंदकिशोर पाराशर ने 19 दिसंबर 2024 को डीएम से ग्राम पंचायत में स्ट्रीट लाइटों के नाम पर फर्जीवाड़ा करने की शिकायत की थी। मामले की जांच के लिए तत्कालीन डीएम शैलेंद्र सिंह ने जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास चंद्र को जांच अधिकारी बनाया था। इसके बाद वह कई बार जांच करने गए, लेकिन विभिन्न कारणों के चलते जांच पूरी नहीं हो सकी।
लेकिन आखिरकार यह जांच अब पूरी हो गई है। जिलाधिकारी को भेजी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार लाइटों ने ही खुद इस फर्जीवाड़े की पोल खोल दी। दरअसल गांव में पांच अलग-अलग ब्रांड की लाइटें लगाई गई थीं। इसमें 33 लाइटें हेलोनिक्स कंपनी की थीं। वहीं अन्य लाइटें शासनादेश में निर्धारित कंपनियों से इतर कंपनियों की थीं। हेलोनिक्स की सभी लाइटों पर 30 अगस्त 2024 की मैन्युफैक्चरिंग तारीख अंकित थी। बस यहीं से यह पूरा खेल सामने आ गया। दरअसल ग्राम प्रधान और सचिव ने लाइटों का भुगतान 9 मई 2022 को किया था। एक ही दिन में दो बार में कुल 193550 रुपये का भुगतान किया गया। ऐसे में यह कैसे संभव था कि लाइटों पर दो साल बाद की तारीख अंकित हो।
वहीं पांच स्थानों पर स्ट्रीट लाइट लगी हुई नहीं मिलीं। ग्राम पंचायत ने इन लाइटों के खराब होने की बात कही। मामले में अब जिलाधिकारी द्वारा ही कार्रवाई की जानी है।
जांच अधिकारी पूछते रहे कौन सी सूची से करें जांच जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास चंद्र ने जांच मिलने के बाद ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव से प्रमाणित सूची मांगी थी। उन्हें जब यह सूची मिली तो यह सूची शिकायतकर्ता की सूची से अलग थी। इस पर जांच अधिकारी ने डीएम से मार्गदर्शन मांगा था। डीएम के निर्देश पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने दोनों सूची का मिलान करते हुए जांच करने के लिए जांच अधिकारी को पत्र भेजा। साथ ही यह भी बताया कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर ग्राम पंचायत में लगाई गईं स्ट्रीट लाइटों की सूची ही उपलब्ध नहीं है। बाद में सीडीओ ने सभी लाइटों की जांच करने के आदेश दिए थे। इसी के बाद जांच अधिकारी ने गांव जाकर गहनता से एक-एक लाइट उतरवाकर जांच की।
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कार्य पूर्ण होने के बाद भुगतान का है प्रावधान ग्राम पंचायत में किसी भी कार्य का भुगतान तभी किया जा सकता है, जब वह कार्य पूर्ण हो जाए। ऐसे में लाइटों का भुगतान जब 9 मई 2022 को किया गया तो लाइटें इस तारीख से पहले ही स्थापित हो जानी चाहिए थीं। शिकायतकर्ता नंदकिशोर ने बताया कि उनकी शिकायत के बाद ही दो साल बाद लाइटें लगवाईं गईं थीं।
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वर्जन
-किशनपुर में लगी स्ट्रीट लाइटों की जांच के आदेश जिलाधिकारी ने दिए थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार जिलाधिकारी के आदेश पर कार्रवाई की जाएगी।
-धनंजय जायसवाल, डीपीआरओ।