कासगंज जिले में स्थापित होने वाला कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान मथुरा (वेटरनेरी विवि) के अधीन होगा। इसके लिए आईसीएआर और विश्वविद्यालय के बीच सहमति बन गई। अब राज्य सरकार को इस पर फैसला लेना है।
दिल्ली में आयोजित बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के उप महानिदेशक (कृषि प्रसार शिक्षा) डा. एके सिंह ने देश भर के नवसृजित जिलों में स्थापित होने वाले कृषि विज्ञान केंद्रों के संदर्भ में क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों के साथ चर्चा की। इस दौरान उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में स्थापित होने वाले कृषि विज्ञान केंद्र को वेटरनेरी विवि मथुरा को दिए जाने की सहमति कुलपति डा. केएमएल पाठक के साथ बनी।
अब विश्वविद्यालय आईसीएआर की सहमति के आधार पर कासगंज कृषि विज्ञान केंद्र के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव देगा। इस पर सहमति के बाद राज्य सरकार विश्वविद्यालय को कासगंज जिले में कृषि विज्ञान केंद्र के लिए 25 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएगी। जहां आईसीएआर की शत-प्रतिशत वित्तीय मदद से कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित किया जाएगा।
आगरा-अलीगढ़ के केवीके का मिले नियंत्रण
वेटरनेरी विवि की अब तक कोशिश आगरा और अलीगढ़ मंडल में स्थापित करीब पांच कृषि विज्ञान केंद्रों का संचालन अपने हाथ लेने की रही है। विवि का तर्क है कि इन मंडलों में स्थापित कृषि विज्ञान केंद्रों से कानपुर कृषि विवि की दूरी अधिक है जहां से इनका संचालन होता है। मथुरा विवि नजदीक होने के कारण इनका संचालन बेहतर ढंग से क्षेत्रीय किसानों की तरक्की के लिए किया जा सकता है।
कासगंज में स्थापित होने वाले केवीके को यूपी वेटरनेरी यूनिवर्सिटी को दिए जाने पर सहमति हुई है। यह प्रस्ताव राज्य सरकार को जाएगा। संभावना है कि जल्द ही राज्य सरकार की सहमति के आधार पर ही 25 एकड़ जमीन विवि को मिल जाएगी। कोशिश होगी राज्य सरकार अनुमति के बाद इसके लिए इसी वित्तीय वर्ष में आईसीएआर से बजट प्राप्त किया जा सके।
- डा. केएमएल पाठक
कुलपति, वेटरनेरी विवि मथुरा