यह थी रामवृक्ष की मंशा
बाबा जयगुरुदेव की 2012 में हुई मौत के बाद अनुयायियों का यह दल अलग हो गया। रामवृक्ष यादव की प्रमुख मांग थी कि राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री जैसे पद समाप्त कर दिए जाएं। भारतीय मुद्राएं रुपये की जगह पर आजाद हिंद बैंक मुद्रा चलाई जाए। उसका मानना था कि वर्तमान भारतीय मुद्रा रिजर्व बैंक व सरकार के हाथों डॉलर की गुलाम बन चुकी है। पेट्रोल डीजल सस्ते दाम पर उपलब्ध हो सकेगा।
नेताजी के लापता होने का किया था दावा
स्वाधीन भारत सुभाष सेना जो कि स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रही समूह की ही सशस्त्र शाखा है। वर्ष 2013 में स्थापित यह शाखा राजनीतिक पार्टी के रूप में पंजीकृत है। इसके सदस्यों ने भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लापता होने के पीछे एक साजिश होने का दावा किया था। 2014 में स्वाधीन भारत ने अपनी मांगों के समर्थन में सागर मध्य प्रदेश से दिल्ली के लिए मार्च शुरू किया। रास्ते में इसी वर्ष के अप्रैल महीने यह दल जवाहर बाग में आ गया।
बातों से बदल देता था विचारधारा
रामवृक्ष यादव और उसके सहयोगी अपने आंदोलन से जोड़ने के लिए लोगों का ब्रेन वॉश करते थे। इसके बाद जवाहर बाग में रोक कर अपनी सहयोगियों की फौज में भर्ती कर लेता था। इस दौरान वह भर्ती हुए लोगों को मासिक वेतन भी देता था। अधिवक्ता एलके गौतम ने बताया कि रामवृक्ष यादव अति महत्वाकांक्षी था और अपनी अलग सरकार चलाने का सपना देखा करता था।