जवाहर बाग में रामवृक्ष का संगठन (स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह) दो फाड़ होने लगा था। रामवृक्ष के दोनों कमांडर चंदनबोस और राकेश गुप्ता अपने अलग-अलग गुट बनाने लगे थे। यह अंदरूनी कलह चंदे की रकम में 1,85,880 रुपये के घपले के मुद्दे पर शुरू हुई थी।
जवाहर बाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष की टीम में यूं तो तमाम लोग थे लेकिन चंदनबोस और राकेश गुप्ता को सबसे खास माना जाता था। राकेश गुप्ता रसद की सप्लाई करता था और संगठन का फाइनेंसर था। जबकि चंदनबोस हर वक्त जवाहर बाग की सुरक्षा में लगा रहता था। जब भी रामवृक्ष जवाहर बाग के मुख्य गेट पर आता तो चंदनबोस उसके साथ रहता था। लेकिन पिछले करीब तीन महीने से इस संगठन में कलह शुरू हो गई थी।
कलह की वजह चंदे की रकम में गोलमाल था। जब रामवृक्ष ने चंदे की रकम को जुड़वाया तो उसमें करीब पौने दो लाख रुपये कम निकले थे। हिसाब की सभी कापियां पलटने के बाद भी इन रुपयों का कोई रिकार्ड नहीं मिल रहा था। जवाहर बाग से जो हिसाब की कापी पुलिस को मिली हैं उसमें इस बात का साफ उल्लेख है। हिसाब चेक करने वाले ने कापी के नीचे वाली लाइन में नोट लगाकर लिखा है कि रुपये कम बैठ रहे हैं।
जब यह मामला रामवृक्ष तक पहुंचा तो उसने चंदनबोस और राकेश गुप्ता दोनों को बुलाकर जवाब तलब किया। यहां दोनों के बीच विवाद हो गया था। बताया गया कि दोनों ही एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे थे। बस यहीं से गुटबाजी शुरू हो गई थी। दोनों ही संगठन की कमान अपने हाथ में लेने के लिए कोशिश करने लगे। अधिक से अधिक लोगों को अपने साथ जोड़ने लगे। पुलिस पूछताछ में चंदनबोस ने भी इस संबंध में पुलिस को बताया था।
रामवृक्ष को घिरता देख भाग निकले थे सभी
दो जून को आपरेशन जवाहर बाग के दौरान एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष फरह संतोष यादव के शहीद होने के बाद पुलिस ने कब्जाधारियों पर बल प्रयोग किया तो भगदड़ मच गई थी। रामवृक्ष को घिरता देख हर वक्त उसके इर्द गिर्द रहने वाले भी अपनी जान बचाकर भाग गए थे। पुलिस पूछताछ में पहले चंदनबोस और अब राकेश गुप्ता ने भी यही कहा है। इन लोगों ने बताया है कि बवाल शुरू होते ही है वे जवाहर बाग से फरार हो गए थे।