क्रांतिकारी राष्ट्रसंत जैन मुनि तरुण सागर ने कड़वे प्रवचनों के आखिरी दिन कहा कि जीवन में मां, महात्मा और परमात्मा से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
बचपन को मां संवारती है, जवानी में महात्मा और बुढ़ापे में परमात्मा का आशीर्वाद जरूरी है। मां बचपन को संभालती है, जवानी में नीयत बिगड़े तो महात्मा प्रवचन से सही रास्ता दिखाता है और बुढ़ापे में मौत बिगड़ती है तो परमात्मा संभाल देता है।
जैन मुनि राधानगर पार्क में रविवार को बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने बेटी की विदाई का सजीव चित्रण किया कि उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।
मां-बाप की आंखों में दो ही मौके पर आंसु आते हैं। एक जब लड़की घर छोड़ती है और दूसरा जब लड़का मुंह मोड़ लेता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आगरा, फीरोजाबाद, फरीदाबाद, कोसी, दिल्ली, पलवल आदि क्षेत्रों से लोग प्रवचन सुनने आए थे। इस अवसर पर प्रवेंद्र अग्रवाल, इनू अग्रवाल का विशेष अभिनंदन किया गया।
सास के लिए कड़वे प्रवचन
-बहू और बेटी में फर्क मत डालिए
-कभी बहू से झगड़ा हो जाए तो उसके पीहर वालों को भला-बुरा न कहिए
-मंदिर में बैठकर बहू की बुराई न करें
-बहू की चाहत का भी ध्यान रखें