फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वास्थ्य केंद्रों पर जूनियर डॉक्टर बना दिए बॉस

Tue, 06 Sep 2016 12:06 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
विज्ञापन
डाक्टर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जूनियर डॉक्टर को बॉस बना दिया गया है। अब इस पर सवाल उठ रहे हैं। बताया गया कि ऐसे में राष्ट्रीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर बुरा असर पड़ रहा है। 
विज्ञापन

शासन का आदेश है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लेबल-तीन (डिप्टी सीएमओ) स्तर के अधिकारी को प्रभारी चिकित्सा अधिकारी बनाया जाए। सरकार की मंशा साफ है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों का क्रियान्वयन किया जाता है ऐसे में यहां अनुभवी चिकित्सक के पास ही प्रभार होना चाहिए। 

लेकिन जिले में हालात ठीक इसके उलट हैं। छाता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डा. करीम अख्तर कुरैशी प्रभारी अधिकारी हैं, जो लेबल-एक के अधिकारी है जबकि यहीं वरिष्ठ चिकित्सक डा. मनीराम उनके अधीनस्थ हैं। 
विज्ञापन


फरह में डा. उदयभान लेबल-तीन के प्रभारी अधिकारी हैं लेकिन यहां डा. अनिल सिंघल जो उनसे वरिष्ठ हैं उनके अधीनस्थ हैं। वृंदावन में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। इसके अलावा नौहझील, बलदेव, गोवर्धन में भी नए चिकित्सकों के पास प्रभार है। 

राष्ट्रीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर असर
विभाग के ही लोग कहते हैं कि स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी, राष्ट्रीय टीकाकरण, एड्स नियंत्रण, जननी सुरक्षा जैसे कार्यक्रम संचालित किये जाते हैं। इनमें एक अनुभवी चिकित्सक की आवश्यकता रहती है।

इसके साथ ही जूनियर बॉस वरिष्ठ चिकित्सकों को दिशा-निर्देश दे ये व्यावहारिक भी नहीं है। ऐसे में कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर बुरा असर लाजमी है। विगत दिनों एक रिपोर्ट में मथुरा जनपद राष्ट्रीय टीकाकरण के मामले में पूरे प्रदेश में फिसड्ी साबित हुआ। 

जो चिकित्सक प्रभारी अधिकारी बनने में रुचि नहीं रखते हैं। उनकी ओर से लिखकर कार्यालय में दिया जाता है। इसी के बाद जूनियर डॉक्टर को उस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रभार दिया जाता है।
विज्ञापन

-डा. विवेक मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी मथुरा
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें