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महंगाई: किताबों पर 20 फीसदी बढ़े दाम

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मथुरा। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही किताबों और स्टेशनरी की कीमतों में आए उछाल ने अभिभावकों की परेशानी बढ़ा दी है। बाजार में इस बार स्कूली किताबों के दाम पिछले साल की तुलना में करीब 15 से 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं।
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पिछले वर्ष निजी स्कूलों में कक्षा दूसरी और तीसरी की किताबों का सेट करीब 2500 से 3000 रुपये में आ रहा था। वहीं इस बार यह सेट 4000 से 4500 रुपये तक पहुंच गया है। एनसीईआरटी की किताबों की कीमत कम होने के बावजूद कई स्कूल पब्लिशर्स की महंगी किताबें अनिवार्य कर रहे हैं।

किताबें ही नहीं, स्टेशनरी के सामान के दाम भी बढ़े हैं। कॉपियां, रजिस्टर और आर्ट फाइल्स के दाम 10 से 25 फीसदी तक बढ़ गए हैं। पिछले साल 40 रुपये में मिलने वाली कॉपी अब 50 से 55 रुपये तक बिक रही है जबकि आर्ट कॉपी 80 से बढ़कर 100 रुपये तक पहुंच गई है। अभिभावकों का कहना है कि यदि कीमतों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो मजबूरन उन्हें अपने बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। जिला विद्यालय निरीक्षक रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों को पढ़ाया जाना चाहिए। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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ये बोले अभिभावक
-फीस, यूनिफॉर्म और ट्रांसपोर्ट के साथ किताब-कॉपियों और स्टेशनरी का खर्च बजट बिगाड़ रहा है। किसी का कोई नियंत्रण नहीं है।
- राधा रानी, निवासी मंशापुरी

-दो बच्चों के कोर्स में 8 से 10 हजार रुपये खर्च हो गए हैं। सरकार को सख्त नियम बनाने चाहिए, नहीं तो हर साल यही हाल रहेगा।
- प्रीति जोशी, निवासी, राधिका विहार
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