मथुरा। औद्योगिक इकाइयों के लिए आम उपभोक्ता से अधिक डीलर की दरें तय किए जाने के बाद खुले बाजार में पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री यकायक बढ़ गई है। औद्योगिक इकाइयां पेट्रोलियम कंपनियों से डीजल की खरीद करने के बजाए अब पेट्रोल पंप से डीजल खरीद रही हैं। इससे वाहनों के लिए पंपों तक पहुंचने वाला डीलर औद्योगिक इकाइयों में खप रहा है। इससे सरकार को नुकसान हो रहा है।
औद्योगिक इकाइयों को कुछ समय पूर्व तक पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा ही सीधे डीजल की आपूर्ति की जाती थी। कंपनियों द्वारा सीधे औद्योगिक इकाइयों को दिए जाने वाले डीजल की कीमत पेट्रोल पंप पर बिक्री होने वाले डीजल से कम होती थी लेकिन अब कुछ समय से यह स्थित बदल गई है। औद्योगिक इकाइयों को कंपनियों से मिलने वाले डीजल की दरें पेट्रोल पंप पर खुले बाजार में मिल रहे डीजल से करीब १५ रुपये महंगी हो गई हैं।
इस स्थिति में औद्योगिक इकाइयां डीजल की पूर्ति पेट्रोलियम कंपनियों के बजाए पेट्रोल पंपों से करने लगी हैं। इससे वाहनों में उपयोग होने वाला डीजल औद्योगिक इकाइयों में जमकर खप रहा है। सरकार को बडे़ राजस्व का नुकसान सहना पड़ रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में पेट्रोलियम कंपनियों के अधिकारियों की सहभागिता है जो सीधी आपूर्ति कम होने के बाद भी चुप्पी साधे हुए हैं।
८०० इकाइयों में डीजल की खपत
जनपद में २००० से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। इसमें से करीब ८०० इकाइयों में डीजल का उपयोग किया जा रहा है। डीजल का यह उपयोग जनरेटर के रूप में अधिक हो रहा है। मथुरा क्षेत्र में भी करीब २५० औद्योगिक इकाइयां इसी दायरे में शामिल हैं। इसमें गौर केंद्र, कृष्णानगर और रिफाइनरी क्षेत्र शामिल है।
अगर ऐसी कोई शिकायत है तो इसकी जांच कराई जाएगी। औद्योगिक इकाइयों को नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
-नवनीत सिंह चहल, जिलाधिकारी