भारतीय संस्कृति और परंपराओं का ज्ञान देने के उद्देश्य से शुक्रवार को एक समारोह का आयोजन शीतल छाया कालोनी स्थित जीवा इंस्टीट्यूट में किया गया। इसमें अमेरिका, जर्मनी, रूस, इंग्लैंड, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, स्पेन, ब्राजील, बेल्जियम, आस्ट्रिया आदि देशों के भक्तों ने भारत की संस्कृति की विविधताएं जानीं।
समारोह में आध्यात्मिक गुरु स्वामी विश्वानंद महाराज ने कहा कि हिंदू धर्म और संस्कृति को बंधनों में नहीं बांधा जा सकता है। आज भी भारत के प्रति विदेशियों की दीवानगी इस बात को प्रमाणित करती है कि भारत आज भी विश्व गुरु है और सदा रहेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता के साथ सनातन हिंदू धर्म की गहराईयां अनंत हैं।
डा. स्वामी महंत सत्यनारायण दास ने कहा कि आदिकाल से विश्व के कई देशों के लोग भारत की प्राचीन वैदिक संस्कृति और सभ्यता की गहराईयों को जानने का प्रयास कर रहे है। भारत की संस्कृति, सभ्यता, परंपराओं के साथ सनातन हिंदू धर्म विदेशियों के लिए शताब्दियों से खोज का एक प्रमुख केंद्र रहा है। पूर्व में भी भारत के ऋषि-मुनियों से यहां की सांस्कृतिक विरासत का अध्ययन करने के लिए विदेशी विद्यार्थी आते जाते रहते हैं।
इस अवसर पर पद्मनाभ दास, कृष्णचंद्र दास, गोकुलानंद दास, ओपी सिंह सिकरवार, सूरजपाल, जया देवी दासी, कमला देवी, पं. लटुक प्रसाद, अनुराग शुक्ला, डा. अनुपम मिश्रा, प्रशांत फौजदार, डा. आशुतोष पांडेय आदि उपस्थित थे।