मथुरा। महिला जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए आईं महिलाएं।
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मथुरा। वाकई बहुत बिगड़ी हुईं हैं मथुरा की स्वास्थ्य सेवाएं। जिला महिला अस्पताल में बुधवार को वैसे तो तीन महिला डाक्टर थीं। इनमें एक अल्ट्रासाउंड कर रही थीं, जबकि एक इनडोर में तैनात थीं। ओपीडी केवल एक महिला चिकित्सक के भरोसे थी। मरीजों की भीड़ 300 के पार। अब जरा सोचिए कि क्या तो परीक्षण हुआ होगा और क्या दवाओं का वितरण। तमाम महिलाएं तो बगैर जांच कराए ही वापस लौट गईं।
जिला महिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी से चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। डॉक्टर न होने से मरीज अस्पताल से वापस लौटने को मजबूर हैं। ऐसे में सीएचसी और पीएचसी से भी रेफर होकर आने वाले मरीजों के लिए समस्या खड़ी हो जा रही। डॉक्टरों की कमी के कारण यहां इलाज नहीं हो पा रहा।
महिला विशेषज्ञ डाक्टरों का अभाव है। ऐसे में मरीज प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर रहे। अस्पताल में डाक्टरों के 17 पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां महज 9 डॉक्टरों की ही तैनाती है। जबकि 11 विशेषज्ञ डाक्टरों के पद रिक्त हैं। बुधवार को जिला महिला अस्पताल में रोगियों की भारी भीड़ थी।
अस्पताल परिसर रोगियों से खचाखच भरा था। एक डाक्टर के छुट्टी पर चले जाने के कारण सारा भार डॉ. मीनाक्षी पर आ गया, जबकि डॉ. अनीता अल्ट्रासाउंड रूम में तथा डाक्टर कल्पना इंडोर का काम देख रही थीं। उमस भरी गर्मी के कारण कई महिला रोगियों की तबियत भी खराब हो गई।
सीएमएस डॉ. बीडी भास्कर का कहना है कि रिक्त लगभग 10 पदों के लिए डिमांड पत्र शासन को भेजा जा चुका है। शासन स्तर पर रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया की जाएगी। बताया कि अस्पताल के ओपीडी में रोजाना करीब 300 से 400 से अधिक मरीज आते हैं।