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ब्रज में देसी बबूल हटाकर लगाए जाएंगे देशी प्रजातियों के पौधे, विकसित होंगे तालाब: डॉ. अरुण कुमार

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वृंदावन। बिहार पंचमी-पंचवटी महोत्सव में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री डॉक्टर अरुण कुमार ने कहा कि ब्रज में अधिकांश क्षेत्र में देसी बबूल लगी है। बबूल ने जमीन का टेस्ट बदलने के साथ ही मिट्टी का कटाव रोका। सरकार अब ब्रज की जमीन और मिट्टी का परीक्षण कराएगी। उन क्षेत्रों से बबूल हटाकर देसी प्रजातियों के पौधे लगाएंगे। जहां गड्ढे हैं वहां तालाब विकसित किए जाएंगे। जिससे परिदों को भी उनके अनुकूल जगह मिलने के साथ ही लोगों को भी अनुकूल माहौल मिलेगा।
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यह बात उन्होंने नगर के कुंभ स्थल में व्यक्त किए। उन्होंने यहां 140 एकड़ में संतों के सानिध्य में पंचवटी बनाने का पौधा लगाकर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने बताया कि वर्ष 2031 में कुंभ होगा तो यहां देशभर से कुंभ स्नान करने वाले लोगों को शुद्ध ऑक्सीजन और पेड़ों की छांव मिलेगी। उसके लिए संतों द्वारा 140 एकड़ में 108 पंचवटी स्थापित की जा रही है। हमारे आराध्य भगवान राम भी वनवास के समय पंचवटी में रहे। जिसमें पीपल, पाखंड, बरगद, आम एवं गूलर लगते हैं। उन्होंने कहा कि देश ही नहीं दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाली पीढ़ी के लिए कैसी दुनिया छोड़कर जाएंगे।
इस समस्या का प्रमुख वजह है वातावरण में तेजी से कार्बनडाई आक्साइड का बढ़ना। इसके लिए प्रधानमंत्री एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी देशवासियों को एक पेड़ मां के नाम लगाने का आह्वान किया है। इसे आगे बढ़ाने का कार्य ब्रज के संतों ने भगवान कृष्ण की लीला भूमि में पौधे लगाकर किया है।
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उन्होंने कहा कि जब से प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है। इन पिछले आठ साल में 242 करोड़ पेड़ राज्य में लग चुके हैं। देश के अंदर इसे लेकर जो सर्वे हुआ उसमें उत्तर प्रदेश अव्वल है। वृक्ष आवरण बढ़ने में देश में प्रदेश दूसरे स्थान पर है। उन्होंने बताया कि जो पेड़ पिछले एक साल में लगे उनमें से 92 प्रतिशत पेड़ जीवित हैं। जो पहले लगे उनमें भी 85 प्रतिशत जीवित हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि प्रदेश में पेड़ लगाना ही नहीं उनकी देखभाल भी ठीक है। देश के प्रधानमंत्री ने एक पेड़ मां के नाम का संदेश दिया क्यों कि मां से बड़ी चीज दुनिया में दूसरी नहीं होती। पेड़ों से हमें ऑक्सीजन मिलती है, जीवन के लिए इससे दूसरी चीज दुनिया में कोई नहीं। इसलिए केंद्र एवं राज्य सरकार ने लोगों से आह्वान किया कि एक पेड़ मां के नाम लगाए और उसकी देखभाल करो।
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