मथुरा। जनपद में सरकारी स्वास्थ्य सेवा का ढांचा चरमराया हुआ है। सरकारी अस्पतालों में न तो विशेषज्ञ चिकित्सक है और न अन्य संसाधन। जिला मुख्यालय स्थित महिला जिला अस्पताल में तो रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है। जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सक यहां दिन में दो घंटे सेवा देते हैं। इस स्थिति में दूरदराज से आने वाली अनेक महिलाएं बिना अल्ट्रासाउंड ही लौट जाती हैं। या उन्हें निजी लैब की शरण लेनी पड़ती है, जहां उन्हें 800-1200 से रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
जिला महिला अस्पताल की स्थापना का उद्देश्य था कि महिलाओं को उपचार में किसी प्रकार की दुविधा का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही जिला अस्पताल पर स्त्री रोगों से संबंधित मरीजों का भार कम होगा, लेकिन आलम यह है कि महिला अस्पताल में खुद का रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है, जबकि यहां प्रतिदिन 70 से 100 महिलाएं अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आतीं हैं। फिलहाल यहां जिला अस्पताल में कार्यरत रेडियोलॉजिस्ट डॉ. देवेंद्र अग्रवाल प्रतिदिन दोपहर 12 से 2 बजे तक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन दो घंटों में 30 से 40 ही अल्ट्रासाउंड हो पाते हैं। इस कारण अन्य महिला मरीजों को आगे की तारीख दी जाती है, जो 20 दिन से लेकर कई बार तो एक माह तक आगे की होती है। ऐसे में महिला मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्हें निजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड कराने जाना पड़ रहा है।
औरंगाबाद निवासी सायरा बानो अपनी बहु मुस्कान का अल्ट्रासाउंड कराने आई। उन्होंने बताया कि 23 अगस्त को उन्होंने अपना नाम दर्ज करवाया था, आज नंबर आया है। इस बीच उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कई चक्कर लगाने पड़े। गर्भवती महिला को इससे काफी परेशानी होती है।
टाउनशिप स्थित कालिंदी कुंज निवासी बलवीर सिंह ने बताया कि उन्हें पत्नी कमलेश देवी का अल्ट्रासाउंड कराना है। सिफारिश के बाद भी उनका नंबर सात दिन बाद आया है। ऐसे में महिला मरीजों की स्थिति खुद ब खुद समझी जा सकती है। सरकार को यहां फुल टाइम रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था करनी चाहिए।
सुभाष नगर निवासी नीशू ने बताया कि वह 20 सितंबर को अल्ट्रासाउंड कराने आई थीं। उन्हें 5 अक्तूबर का समय दिया गया। सरकार को महिलाओं के मजबूरी समझनी चाहिए। ताकि उन्हें निजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए न जाना पड़े। गर्भावस्था के दौरान इधर-उधर जाने में उन्हें काफी परेशानी होती है।
जिला महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। महिला मरीजों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए डॉ. देवेंद्र अग्रवाल को दो घंटे के लिए यहां संबद्ध किया गया है। रेडियोलॉजिस्ट की मांग के लिए शासन को लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं।
डॉ. रितु कात्याल, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक