मथुरा। बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी तेजी से टीबी की चपेट में आ रहे हैं। प्रतिरोधक क्षमता कम होते ही बच्चों को टीबी अपने शिकंजे में जकड़ रही है। बच्चे का ध्यान न रखना या उसके खानपान में लापरवाही करना उसे टीबी का मरीज बना सकता है। मथुरा में टीबी के कुल मरीजों में लगभग पांच प्रतिशत संख्या बच्चों की सामने आई है। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों को टीबी से यदि बचाना है तो माता पिता को उनके खानपान का विशेष ध्यान रखना होगा।
जिले में टीबी की चपेट में लोग तेजी से आ रहे हैं। साल भर में महिला, पुरुष और बच्चों को मिलाकर कुल 17103 टीबी के मरीज मिले हैं। इन सभी का सरकारी अस्पताल में उपचार चल रहा है। चौंकाने वाले आंकड़े यह हैं कि इनमें 773 बच्चे भी हैं जिनकी उम्र पांच साल या उससे कम है। अधिकतर बच्चे फेफड़े की टीबी से पीड़ित हैं। जिला क्षय रोग विभाग की ओर से टीबी मरीजाें को चिह्नित करने के लिए स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है जिनमें इन सभी का चिह्नीकरण हुआ है। शहर से लेकर देहात तक सभी बच्चे टीबी की चपेट में आ रहे हैं। सबसे पहले बच्चों के गले की नस फूलने के साथ भूख कम लगने और वजन कम होने की शिकायत मिली तो उनकी जांच हुई। पता चला कि सभी को टीबी है।
चिकित्सकों की मानें तो प्रतिरोधक क्षमता कम होते ही बच्चे टीबी की चपेट में आते हैं। इन सभी में भी यही कारण है। कुछ बच्चों के घरों में टीबी की मरीज हैं तो कुछ बाहरी लोगों के संपर्क में आकर टीबी से पीड़ित हुए हैं। स्कूल आते जाते समय या स्कूल में भी टीबी बच्चों को अपनी चपेट में ले सकते हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डाॅ. संजीव यादव के मुताबिक यदि बच्चे खानपान बेहतर है और उसकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है तो वह बीमारी से दूर रहता है। उन्होंने कहा कि टीबी के लक्षण नजर आने पर परिजन तुरंत अस्पताल में पहुंचकर जांच कराएं।
टीबी के प्रमुख लक्षण
- दो सप्ताह से अधिक खांसी का बने रहना
- शरीर में हल्का बुखार रहना
- पेट और गले में गांठ, भूख न लगना
- रात में पसीना आना, बार-बार दस्त होना
- लगातार वजन कम होना
- लंबे समय तक पेट में दर्द
ये बरतें सावधानी
- खांसी से पीड़ित लोगों से दूरी बनाएं
- ज्यादा प्रोटीन देने वाले खाद्य पदार्थों का करें सेवन
- बच्चों को टीबी के लिए बीसीजी का टीका लगवाएं
- लक्षण दिखने पर तुरंत कराएं जांच