अलीगढ़ के लोधा थाना क्षेत्र में हुए हादसे में मृत मुख्य आरक्षी (चालक) चंद्रपाल सिंह (55वर्ष) थाना नौहझील क्षेत्र के गांव मानागढ़ी के रहने वाले थे। बृहस्पतिवार को पुलिस द्वारा जैसे ही परिजनों को सूचना दी, उनमें कोहराम मच गया। परिजन और ग्रामीण घटना स्थल के लिए रवाना हो गए। पोस्टमार्टम के बाद देर शाम उनका शव गांव पहुंचा, जहां सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
वर्तमान में फिरोजाबाद में तैनात चंद्रपाल सिंह की पत्नी राजन देवी ने बताया कि पति से बुधवार शाम फोन पर लगभग 20 मिनट तक बात हुई। उन्होंने एक-एक कर परिवार के सभी लोगों का हाल-चाल जाना। अपनी 80 वर्षीय बुजुर्ग मां शकुंतला देवी से भी बात की। 11 मई, रविवार को घर आने की बात कही। वह 4 मई, रविवार को भी सुबह घर आए थे। गांव में एक युवक की गमी में शामिल होकर शाम को ड्यूटी पर लौट गए। अलीगढ़ में पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव को लेकर देर शाम गांव पहुंचे। मां, पत्नी व बच्चों सहित परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है। शोक व्यक्त करने के लिए सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उनके आवास पर जुटे रहे।
बेटा कर रहा एमबीबीएस
चंद्रपाल का छोटा बेटा लवी चौधरी (21 वर्ष) केडी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहा है। बड़े बेटे पवन चौधरी की वर्ष 2010 में 21 वर्ष की उम्र में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। तीन बेटियों में दो की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बेटी एमबीए की तैयारी कर रही है। चंद्रपाल चार भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके छोटे भाई शीशपाल बुलंदशहर में उपनिरीक्षक हैं, जबकि संजीव कुमार प्राथमिक में शिक्षक हैं। एक भाई डाॅ. दानवीर सिंह सादाबाद में सीएचसी प्रभारी हैं।