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नंगे बदन पर पडे़ंगे प्रेम से पगे कोड़े

Wed, 23 Mar 2016 11:23 PM IST
राजेश पाठक
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द्वारिकाधीश मंदिर में डोल महोत्सव की धूम - फोटो : अमर उजाला
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ब्रज में दाऊजी के हुरंगा की अनूठी परंपरा है। यहां मंदिर प्रांगण में हुरियारिनें, हुरियारों के नंगे बदन पर प्रेम से पगे कोड़े लगाएंगी। तड़ातड़ पड़ने वाली कोड़ों की मार को देखने के लिए बड़ी संख्या में देश और विदेश के श्रद्धालु हलधर की नगरी में जुटते हैं।
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इस बार 25 मार्च को बलदेव में हुरंगा होने जा रहा है। इसके लिए गुरुवार को सुबह 11 बजे से ब्रज के राजा श्रीदाऊजी महाराज की नगरी बलदेव में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगेगा। हुरंगा के नायक शेषावतार बलदेवजी के अलबेले छैल छिकनियां स्वरूप के भक्तों को दर्शन देंगे। दाऊजी कौ हुरंगा की अनूठी परंपरा आज भी कायम किए लोगों का कहना है कि देख-देख या ब्रज की होरी ब्रह्मा मन ललचावै...। ब्रज की होली श्रीकृष्ण और राधा पर केंद्रित है, वहीं दाऊजी कौ हुरंगा उनके बडे़ भ्राता बलदेवजी पर केंद्रित है।

दाऊजी के हुरंगा में पुरुषों के गोप समूह को महिलाओं के गोपिका स्वरूप द्वारा पोतने (कोड़ो) की मार नगे बदन पर झेलनी पड़ती है। यहां का हुरंगा ब्रज की होली महोत्सव का मुकुटमणि है। धूल के अगले दिन 25 मार्च को हुरंगा का आयोजन सुबह 11 बजेे से दाऊजी मंदिर में होगा। हुरंगा खेलने के लिए ब्रज की गोपिका स्वरूप महिलाएं आकर्षक पहनावे में परंपरागत लहंगा-फरिया, आभूषण आदि पहन कर मंदिर के द्वारों से होली गीत गाते हुए प्रवेश करेंगी। गोप स्वरूप में पुरुष बगीचियों पर भांग का भोग अपने आराध्य दाऊजी महाराज को लगा कर होली खेलने आते हैं। भांग घोटते समय ब्रज के राजा भांग पीवे तो यहीं पर आजा, से आमंत्रित कर भांग का भोग लगाते हैं।
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हुरंगा में गोस्वामी कल्याणदेवजी के वंशज सेवायत पांडेय समाज के स्त्री-पुरुष खेलते हैं। मंदिर प्रांगण में समाज गायन होरी आई रे श्याम मेरी सुधि लीजौ... के स्वर गुंजायमान होते हैं। महिलाएं ऊंचे स्वर में नंद के तोते होरी जब खेलूं मेरी पौहचीं में नग जड़वाय.. गाती हैं। मंदिर के पट खुलते ही दाऊजी महाराज अलबेले छैल छिकनियां स्वरूप में दर्शन के दौरान ऐसे लगते हैं जैसे साक्षात हुरंगा खेलने के लिए उपस्थित हों। महिलाएं पुरुषों के बदन से कपडे़ फाड़ कर कोड़ा बनाकर प्रेम से टेसू के रंग में भिगो कर पुरुषों के नंगे बदन पर प्रहार करती हैं।
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