यमराज की फांस से मुक्ति की लालसा में शुक्रवार को यमुना के विश्राम घाट पर लक्खी मेला लगेगा। यहां बहन और भाई हाथ पकड़कर यमुना में स्नान करेंगे और यम की फांस से मुक्ति पाएंगे। इस पर्व पर देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु मथुरा आते हैं।
यमद्वितीया का पर्व मथुरा में तीर्थराज विश्राम घाट पर मनाया जाता है। यहां बहन और भाई हाथ पकड़कर यमुना में स्नान करते हैं। इसके बाद विधि-विधान से पूजा अर्चना के बाद बहन अपने भाई के माथे पर तिलक करती है, भोजन करवाती है और पान खिलाती है।
इसके बाद भाई अपनी बहनों को उपहार, दक्षिणा स्वरूप नगद धनराशि प्रदान करते हैं। विश्राम घाट पर ही प्राचीन यमराज और उनकी बहन यमुना महारानी का मंदिर है। घाट पर पूजा अर्चना के बाद बहिन और भाई इस मंदिर में दर्शन कर मनौती मांगते हैं।
सनत्कुमार संहिता में है उल्लेख
ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी के अनुसार सनत्कुमार संहिता में इस बात का उल्लेख है कि यमुना महारानी अपने भाई यमराज से अपने घर आने का आग्रह करती हैं। इस पर यमराज अपनी बहन के यहां आते हैं। यहां यमुना उनका आदत सत्कार करती है अपने हाथ से भोजन बनाकर खिलाती है।
इस पर भाई अपनी बहन से वर मांगने को कहते हैं। यमुना महारानी उनसे कहती है कि इस दिन जो भी यमुना में स्नान करे उन्हें यमलोक की फांस से मुक्ति मिल जाए। इस पर यमराज अपनी बहन यमुना को वर देते हैं कि कार्तिक शुक्ल द्वितीया को जो भाई और बहन हाथ पकड़कर यमुना में स्नान करेंगे उन्हें यमफांस से मुक्ति मिल जाएगी।
पर्व की मान्यता-
इस दिन यमुना के घाट पर धर्म के भाई-बहन बनाए जा सकते हैं।
भाई को टीका, मिठाई, पान खिलाने से बहिन को मिलता है एक वर्ष तक सुहागन का वरदान
बहिन के हाथ से भोजन करने पर भाई को मिलती है एक साल तक की सुरक्षा
भाई अपनी बहन को वस्त्र, आभूषण और दक्षिणा देकर संतुष्ट करें