‘अरे होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया, आज बिरज में होरी रे रसिया...’, ब्रजफाग द्वारकेश रसिया मंडल के संस्थापक चुन्नी लाल चौबे के स्वरों में होली के गीत श्रद्धालुओं को आनंदित कर रहे हैं। इस बीच कई बार श्रद्धालु ठाकुर के चरणों से लगे गुलाल को पाने के लिए लालायित हो उठते हैं। हास-परिहास होता है और होली का उल्लास चरम को छूने लगता है।
होली के गीतों पर श्रद्धालु मगन होकर खूब नाचने और गुनगुनाते हैं। एक दूसरे पर गुलाल की मार भक्तों को निहाल कर देती है। होलाष्टक 16 मार्च से मंदिर में ठाकुर द्वारिकानाथ पिचकारी से होली खेलेंगे। इन पिचकारियों की साफ-सफाई का कार्य पूर्ण हो चुका है।
ब्रज में होली
-16 मार्च होलाष्टक से द्वारिकाधीश में रंगभरनी पिचकारियों से होगी होली
-16 मार्च को नंदगांव आमंत्रण देने जाएंगी बरसाना की हुरियारिन, शाम को लड्डू होली
-17 मार्च को बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लठामार होली का आयोजन
-18 को नंदगांव में होगी लठामार होली
-19 को श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर लठामार होली, बांकेबिहारी मंदिर में होगा होली उत्सव
-20 मार्च को कृष्ण की क्रीड़ा भूमि गोकुल में होगा छड़ी हुरंगा
-23 मार्च को प्राचीन द्वारिकाधीश मंदिर में होगा डोल महोत्सव
-25 मार्च को बलदेव में होगा विश्व प्रसिद्ध हुरंगा