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Mathura News: नाम, रूप और लीला उनके लिए थी खास, ऐसे थे स्वामी हरिदास

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वृंदावन। पत्थरपुरा स्थित बड़ी सूरमा कुंज में चल रहे श्रीगौड़ीय वैष्णवाचार्य श्रीहरिदास महाराज के दस दिवसीय नित्य निकुंज गमन महोत्सव के अंतर्गत वृहद संत विद्वत सम्मेलन का आयोजन किया गया। महंत जगन्नाथ दास शास्त्री महाराज की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में संतों और विद्वानों ने श्रीहरिदास महाराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए कहा कि नाम, रूप, लीला और धाम उनके लिए खास थे। वह सदैव इनके उपासक रहे।
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सम्मेलन का शुभारंभ याज्ञिक रत्न आचार्य विष्णुकांत शास्त्री के मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद संतों एवं विद्वानों ने श्रीहरिदास महाराज के जीवन, उनकी साधना, गुरु भक्ति और समाज के प्रति उनके योगदान पर विचार व्यक्त किए। श्रीमज्जगद्गुरु स्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज एवं संत प्रवर स्वामी गोविंदानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि संत प्रवर ने अपना संपूर्ण जीवन गुरु भक्ति और भगवद् साधना में व्यतीत किया। उनका जीवन साधना, सेवा और भक्ति का प्रेरणास्रोत रहा। श्रीमहंत फूलडोल बिहारीदास महाराज एवं महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद शास्त्री महाराज ने कहा कि नित्य निकुंज लीला प्रविष्ट श्रीहरिदास महाराज संत समाज के गौरव थे। महामंडलेश्वर डॉ. आदित्यानंद गिरि महाराज एवं महामंडलेश्वर योगी नवल गिरि महाराज ने कहा कि वह अत्यंत सहज, सरल, उदार और परोपकारी संत थे। वह प्रत्येक प्राणी में प्रभु का दर्शन करते थे।
सम्मेलन में महंत सुंदरदास महाराज, स्वामी भानुदेवाचार्य महाराज, महंत जगन्नाथानंद महाराज, महंत मोहिनी शरण महाराज, पूर्व प्राचार्य डॉ. रामसुदर्शन मिश्र (नैयायिक गुरुजी), आचार्य भूति कृष्ण महाराज (श्रीशुकाचार्य पीठ), अनुज गोपाल शास्त्री, महंत गौर गोपाल दास महाराज, महंत परमेश्वर दास महाराज, महंत रसराज दास महाराज, गिरधर गोपाल भक्तमाली, संत अच्युतानंद दास शास्त्री महाराज, संत रामदास महाराज (अयोध्या), आचार्य गोपाल भैया महाराज, डॉ. राधाकांत शर्मा, पुंडरीक त्रिपाठी, संत माधव दास महाराज आदि ने विचार व्यक्त किए।
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