मथुरा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की बेशकीमती जमीन व भवन को लेकर तीन दशक से चल रहे विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए डायट प्रशासन को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति विकास की एकलपीठ ने वर्ष 2019 से लंबित सिविल अपील संख्या 72/2019 को पुनः बहाल करते हुए अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित तीनों आदेशों को निरस्त कर दिया है।
वर्ष 1996 में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) एवं डायट मथुरा की ओर से मूल वाद संख्या-67/1996 दायर किया गया था। इसमें कहा गया था कि मथुरा-आगरा हाईवे स्थित राधा जूनियर हाई स्कूल की संपत्ति वर्ष 1958 के विक्रय विलेख के माध्यम से दीक्षा विद्यालय को हस्तांतरित हुई थी। इसे बाद में राज्य सरकार के अधीन डायट संस्थान के रूप में विकसित किया गया।
डायट प्रशासन का आरोप था कि कथित राधा जूनियर हाई स्कूल सोसायटी एवं उससे जुड़े लोग संस्थान की भूमि पर अवैध हस्तक्षेप कर कब्जे का प्रयास करना चाहते हैं। वर्ष 2000 में निचली अदालत ने डायट के पक्ष में अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करते हुए विवादित भूमि पर निर्माण कार्य रोक दिया था। हालांकि वर्ष 2019 में सिविल न्यायालय द्वारा मूल वाद खारिज कर दिया गया। इसके विरुद्ध डायट प्रशासन ने जिला न्यायालय में अपील दायर की थी। अपील लंबित रहने के दौरान सोसायटी के कथित प्रबंधक हरस्वरूप सिंह की मृत्यु हो गई। इसके बाद अधिकृत प्रतिनिधि के प्रतिस्थापन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। अधीनस्थ न्यायालय ने प्रतिस्थापन प्रक्रिया पूरी न होने के आधार पर 24 मई 2024 को अपील खारिज कर दी थी।
इसके बाद डायट प्रशासन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट में योजित याचिका संख्या 13671/2024 में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय 5 मई, 2026 में कहा कि केवल तकनीकी आधार पर अपील खारिज करना न्यायोचित नहीं कहा जा सकता। यह भी उल्लेख किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व में मामले में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे ताकि शैक्षिक भवनों को नुकसान न पहुंचे।
उच्च न्यायालय ने डायट प्रशासन को 30 मई 2026 तक अधिकृत प्रतिनिधि को पक्षकार बनाने का अंतिम अवसर प्रदान किया है तथा निचली अदालत को अनावश्यक स्थगन से बचते हुए शीघ्र सुनवाई कर अपील का निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। डायट प्राचार्य डॉ. मुकेश अग्रवाल ने बताया कि हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए तीनों आदेशों को निरस्त कर दिया है। डायट प्रशासन की यह एक बड़ी जीत है।