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स्वर्ण-रजत हिंडोले में विराजे बांकेबिहारी महाराज

Mon, 17 Aug 2015 11:54 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
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स्वर्ण-रजत जड़ित हिंडोला और उसमें झूलते ठाकुर बांकेबिहारी महाराज। धर्मनगरी में हरियाली तीज पर्व पर इस अनुपम दर्शन के साथ हिंडोला महोत्सव (झूलनोत्सव) का आगाज हो गया है। सोमवार को ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में ठाकुरजी अपने अनोखे हिंडोले में विराजे।
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अर्द्धरात्रि तक उनके दर्शन को विश्वभर से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता रहा। भक्त अपने आराध्य की हिंडोले में विराजित छवि मन में बसाकर ही मंदिर से गए। जिसे हिंडोले की डोर पकड़ने को मिली, वह तो खुद को धन्य कहता रहा। धर्मनगरी के मंदिरों में ठाकुरजी को झूला झुलाने का यह क्रम अब रक्षाबंधन पर्व तक जारी रहेगा।
 
सोमवार को शाम चार बजे जैसे ही ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के पट खुले तो श्रद्धालुओं के भक्ति भाव के अतिरेक का ठिकाना न रहा। मंदिर प्रांगण में स्वर्ण-रजत जड़ित हिंडोले में झूलते ठाकुरजी के दर्शनों के लिए आस्था का समुद्र उमड़ पड़ा था। दर्शन मध्यरात्रि 12 बजे तक खुले रहे।
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इस दौरान बार बार मंदिर परिसर ठाकुर बांके बिहारीलाल के जयकारों से गुंजायमान हो रहा था। दोपहर से ही मंदिर परिसर में डेरा डाले श्रद्धालुओं का मन मंदिर के मुख्यद्वार, चबूतरे और मंदिर प्रांगण में सुगंधित पुष्पों से आ रही महक से आनंदित हो गया। प्रांगण में महिलाएं बधाई गायन कर रहीं थीं। पट खुलते ही श्रद्धालुओं ने हाथ उठाकर आराध्य के जयकारे लगाए। इस दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मंदिर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात था। मंदिर के बाहर भी सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रही।

थककर लाड़ले ने सुखसेज पर किया विश्राम 
वर्ष में सिर्फ एक बार स्वर्ण हिंडोले में भक्तों को दर्शन देने के बाद ठाकुर बांकेबिहारी महाराज थककर सुखसेज पर विश्राम करते हैं। मंदिर सेवायत गोपी गोस्वामी ने बताया कि सुखसेज पर ठाकुरजी की सेवा में रजत कलश में जल, रजत कंघी, पान का बीड़ा, आदमकद रजत आईना और लड्डू आदि निवेदित किए जाते हैं। 
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