रामानंद सागर के धारावाहिक रामायण और श्रीकृष्णा में अपनी कालजयी आवाज और संगीत से जन-जन के बीच पहचान बनाने वाले प्रख्यात संगीतकार, गायक और गीतकार रविंद्र जैन ब्रजभूमि में सदा याद किए जाएंगे। ब्रजभूमि से अत्यधिक लगाव रखने वाले महान कलाकार ने अपनी गायकी, संगीत और लेखनी को हमेशा कान्हा की ही कृपा बताया। उनके निधन से ब्रज भी शोक में है।
रविंद्र जैन ने वर्ष 2004 में स्वामी हरिदास संगीत और नृत्य महोत्सव में भजनों की प्रस्तुति देकर स्वामीजी को अपनी भावांजलि प्रकट की थी। वर्ष 2012 में वे हरे कृष्णा आर्किड में भी एक धार्मिक कार्यकम में आए। 17 अगस्त 2014 को जन्माष्टमी पर्व के उपलक्ष्य में भजन संध्या के दौरान उन्होंने अपनी मधुर आवाज से सभी को मोह लिया था।
वृंदावन आगमन पर रविंद्र जैन कहते थे कि यह पिछले जन्मों का सौभाग्य ही है कि यहां उनका आना लगा रहता है। उन्होंने कहा था कि कान्हा नगरी में आकर उन्हें सदा ही वास्तविक शांति की अनुभूति हुई। जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर कृष्ण नगरी में कान्हा के लिए गाना भी प्रभु की अनुकंपा से ही संभव हो सकता है।
उनके प्रसिद्ध भजनों में ‘श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी..., मंगल भवन अमंगल हारी... आदि हैं। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने इसी वर्ष उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया था। इस प्रख्यात संगीतकार के निधन पर पद्मश्री कृष्णा कन्हाई, हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव समिति के सचिव आचार्य गोपी गोस्वामी, अनूप शर्मा ने दुख प्रकट किया है।