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ग्रेटर फ्लेमिंगो की पसंदीदा जगह बनी मथुरा

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पानी में विचरण करते ग्रे फ्लेमिंगो। - फोटो : MATHURA
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मथुरा/फरह। मथुरा की जोधपुर झाल वेटलैंड, छाता-कोसी के वेटलैंड्स और वृंदावन के यमुना के किनारे ग्रेटर फ्लेमिंगो की सबसे पसंदीदा जगह बन गई हैं। फोटोग्राफरों के लिए यह पक्षी खास हैं। फ्लेमिंगो देखने के लिए पक्षी प्रेमी गुजरात व महाराष्ट्र से यहां आ रहे हैं।
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ये पक्षी आगरा के सूर सरोवर बर्ड सेंचुरी और भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क भी पहुंचते हैं, लेकिन अब ग्रेटर फ्लेमिंगो का यहां से मोहभंग हो रहा है। जोधपुर झाल और छाता पर मानसून के स्वच्छ पानी का संग्रह और मिट्टी में मौजूद लवणीय तत्वों में नमक की मात्रा के कारण फ्लेमिंगो को भोजन की भरपूर उपलब्धता के कारण यह जगह फ्लेमिंगो को रास आ रही है। डॉ. केपी सिंह ने बताया कि उत्तर भारत में यह सर्दियों के प्रवास पर आते हैं। मार्च से वापस लौटना शुरू कर देते हैं। पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह ने जोधपुर झाल वेटलैंड व छाता, कोसी स्थित वेटलैंड्स के रखरखाव और सुरक्षा के लिए डीएम, डीएफओ और सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता से मिलकर सुरक्षा एवं पानी के अभाव से होने वाली समस्याओं से अवगत कराया है।
अक्टूबर से जनवरी तक रुके फ्लेमिंगो
बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष एवं पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि जोधपुर झाल पर कई वर्षों से ग्रेटर फ्लेमिंगो आ रहे हैं। वर्ष 2018 से संस्था द्वारा इनकी निगरानी की जा रही है। वर्ष 2020 के 3 अक्तूबर से एक जनवरी तक फ्लेमिंगो के तीन समूह बारी-बारी से यहां ठहर कर जा चुके हैं। प्रत्येक समूह 20-25 दिन तक रुका है। पहले समूह में 8, दूसरे समूह में 16 और तीसरे में इनकी संख्या 100 से अधिक थी। छाता, कोसी स्थित वेटलैंड्स पर ग्रेटर फ्लेमिंगो का 12 सदस्यों का समूह रुका हुआ है। वृंदावन पर 4 फ्लेमिंगो का समूह रिकॉर्ड किया गया है।
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