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Mathura News: मठ, मंदिर और देवालयों की परंपरा में हस्तक्षेप न करे सरकार

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मथुरा। अंतरराष्ट्रीय सेवायत परिषद की बैठक में मौजूद सेवायत व गोस्वामीजन।  - फोटो : mathura
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वृंदावन। प्रस्तावित ठाकुर बांकेबिहारी कॉरिडोर के विरोध में शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय सेवायत परिषद भी उतर आई है। वृंदावन के बिहारीपुरा में आयोजित परिषद की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र बल्लभ गोस्वामी ने कहा कि वृंदावन की रसोपासना और सांस्कृतिक विरासत को ब्रजवासी ही समझ सकते हैं। सरकार को मठ, मंदिर और देवालयों की परंपरा में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि वृंदावन की कुंज गलियों को सरकार नष्ट न करे। वहीं परिषद के राष्ट्रीय संयोजक हितेंद्र कुमार गोस्वामी ने कहा कि वृंदावन धाम दिव्य और चिन्मय है। यहां की परंपरा, पूजा सेवा सदियों से यहां के गोस्वामी संभालते आ रहे हैं। जहां सरकार कॉरिडोर बनाना चाह रही है वहां पुराने और प्राचीन मंदिर हैं। राधावल्लभ संप्रदाय के ही चार मंदिर, आचार्यों की समाधियां और शिव मंदिर भी इसी क्षेत्र में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए।
बैठक में शामिल इतिहासकार प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने कहा कि सरकार वृंदावन के इतिहास, भूगोल और नागरिक शास्त्र को ही बदलना चाहती है, जो भारी अपराध होगा। सभा का संचालन मधुमंगल शुक्ला ने किया। पं. मुकेश पुरोहित, गोपेश गोस्वामी, मनमोहन गोस्वामी, पवन बिहारी गौड़, समीर शुक्ला, सोहन लाल मिश्र, गोविंद खंडेलवाल, राजू गोस्वामी, नीरज गोस्वामी आदि अन्य लोग मौजूद थे।
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ब्रज वृंदावन देवालय समिति की कोर कमेटी ने भी कॉरिडोर का किया विरोध
वृंदावन। ब्रज वृंदावन देवालय समिति कोर कमेटी की बैठक शुक्रवार को जय सिंह घेरा में हुई। बैठक में मंदिर और देवालयों की स्वायत्तता, सेवा परंपरा के संरक्षण के साथ ही सेवायतों के अधिकार पर चर्चा हुई। मौजूद सेवायत और आचार्यों ने सरकार द्वारा कॉरिडोर के लिए मंदिरों के अधिग्रहण के प्रयास का प्रबल विरोध किया।
संगठन के अध्यक्ष आलोक कृष्ण गोस्वामी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सभी सेवायतों ने एक स्वर में कहा कि मंदिरों की सेवा में प्राचीन काल से जो परंपराएं चली आ रहीं हैं, उसमें किसी तरह का हस्तक्षेप न हो। निर्णय लिया गया कि गोस्वामियों और सेवायतों के अधिकारों में हस्तक्षेप, मंदिरों की व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप, मंदिर की भोग राग एवं अन्य सेवाओं में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संगठन के संरक्षक आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी महाराज, गोविंद पांडेय, कांतानाथ चतुर्वेदी, गोविंद महंत, गोपीनाथ लाल देव गोस्वामी, विजय किशोर देव गोस्वामी, मनीष पारीख, रामदास चतुर्वेदी आदि मौजूद थे।
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