ग्यारह दिवसीय श्रीप्रियाकांत जू दिव्य दर्शन महोत्सव का बुधवार को भावपूर्ण समापन हो गया। इस अवसर पर शांति सेवा धाम पहुंचे प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने सुसज्जित शांति सेवा सभागृह का लोकार्पण किया। इसके बाद वे देवकीनंदन महाराज और विजय कौशल महाराज के साथ प्रियाकांत जू मंदिर के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह हमारी सभ्यता है कि हम प्राचीनता को संजोते हैं और वर्तमान को संवारते हैं।
उन्होंने कहा कि वृंदावन कृष्ण मंदिरों की नगरी है, अयोध्या में रामजी के मंदिर ही मंदिर है, काशी बाबा भोलेनाथ के मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि कमल पुष्प की आकृति में बना प्रियाकांत जू मंदिर वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं को भक्ति का संदेश प्रदान करेगा।
गौ रक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में उस राज्य और क्षेत्र को ज्यादा संपन्न माना जाता था जिसके पास ज्यादा गौ धन और पशुधन होता था। पिछले दिनों वेटरनेरी कालेज के दीक्षांत समारोह की यादें ताजा करते हुए उन्होंने कहा कि वहां बताया गया था कि मथुरा में 220 पंजीकृत और गैरपंजीकृत गोशालाएं हैं। इनमें 2, 26000 गौ वंश हैं। इस लिहाज से ब्रज गौ धन से बहुत संपन्न है।
राज्यपाल ने अंग्रेजी स्कूलों में बच्चों को राम, राधा नामोच्चारण और तिलक लगाने से रोकने पर उठाई गई शंकाओं को दूर करते हुए कहा कि हमारी आस्थाओं और भावों पर दुनिया में कोई भी रोक नहीं लगा सकता। जो राम, कृष्ण नाम और मस्तक पर तिलक लगाने का विरोध करते हैं ऐसे लोग अज्ञानी हैं, उन्हें माफ कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा धर्म वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा को प्रशस्त करता है।
संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि भारत इसलिए विश्वगुरु है कि यहां सभ्यता, मर्यादा, जीवन शैली और श्रेष्ठता के प्रतिमान स्थापित हुए हैं। देवकीनंदन ठाकुरजी ने आभार जताया। इस अवसर पर सतीश गर्ग, धन्नू भैया, एमएल सोनी, एचपी अग्रवाल, प्रवीण कुमार, आरके जैन, गोपाल कुमार सनेही, लता, सुमित, संतोष कंवर, विजय शर्मा, श्यामसुंदर शर्मा उपस्थित थे।