ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) का प्रदेश सम्मेलन बुधवार को दूसरे दिन बजरंग दल, एबीवीपी कार्यकर्ताओं के हंगामे के साथ समाप्त हो गया। इस दौरान आइसा पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला।
बंगाली घाट पर आयोजित सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि जब से भाजपा की फासीवादी सरकार केंद्र में आई है तब से देश असहिष्णुता बढ़ी है। उच्च शिक्षा को डब्लूटीओ के हाथों बेचने, नॉन नेट फेलोशिप बंद करना, रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या के विरोध में आइसा और जेएनयू के छात्र सरकार का चेहरा बेनकाब करने में जुटे थे।
इसका बदला लेने के लिए केंद्र सरकार ने साजिशन जेएनयू की घटना को प्रायोजित कराया है। दरअसल सरकार इस बहाने जेएनयू और वामपंथ को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
वक्ताओं ने प्रदेश सम्मेलन के दौरान बजरंग दल और एबीवीपी कार्यकर्ताओं द्वारा गालीगलौज की निंदा की। साथ ही कन्हैया को तत्काल रिहा करने की मांग भी की।
अध्यक्ष सुधांशु वाजपेयी ने बताया कि सम्मेलन में सर्वानंद को अध्यक्ष और सुनील मौर्या को सचिव, पूजा शुक्ला, करन सारस्वत को उपाध्यक्ष, नीतीश कनौजिया और शालू यादव को सहसचिव चुना गया।