मथुरा। मथुरा-पलवल रेलमार्ग पर वृंदावन-आझई के बीच हुए मालगाड़ी हादसे के बाद अब रेलवे अधिकारी हादसे में हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं। मालगाड़ी के 12 वैगन पटरी से उतरे थे। प्रत्येक वैगन में 70 टन कोयला भरा था, जो बर्बाद हो गया है। कोयले की कीमत लाखों में बताई गई है। वृंदावन रोड-आझई रेलवे स्टेशन के बीच सेकेंड डॉउन मेन लाइन पर मंगलवार की रात करीब 8 बजे मालगाड़ी संख्या पीएमआरबी के 12 डिब्बे पटरी से उतर गए थे।
हादसे के बाद अप मेन लाइन, डाउन मेन लाइन व थर्ड लाइन पर ट्रेन संचालन बाधित हो गया था। मालगाड़ी में कोयला भरा था। हादसे के बाद 12 डिब्बों में भरा कोयला रेलवे ट्रैक पर बिखर गया था। रेलवे ट्रैक पर बिखरे कोयले, दुर्घटनाग्रस्त डिब्बे व क्षतिग्रस्त ट्रैक को पूरी तरंह ठीक करने में रेलवे को 36 घंटे का समय लग गया।
ट्रैक ठीक करने के बाद रेलवे अधिकारी नुकसान का आकलन करने में जुट गए हैं। रेलवे नियमों के अनुसार मालगाड़ी में लोड किया माल सकुशल पहुंचे इसकी जिम्मेदारी रेलवे की होती है। माल यदि रास्ते में किन्हीं कारणों से खराब हो जाता है, तो कंपनी खराब हुए माल का मुआवजा रेलवे से मांग सकती है। कोयले से भरी मालगाड़ी के 12 डिब्बे पटरी से उतरे थे, प्रत्येक डिब्बे में 70 टन कोयला भरा था। इस हिसाब से 8400 टन कोयला बरबाद हो गया। कोयला पंजाब स्थित थर्मलपावर प्लांट के लिए जा रहा था।
रेलवे अधिकारियों की माने तो जो कोयला बर्बाद हुआ है उसकी कीमत 1600 रुपये प्रतिटन है। इस हिसाब से करीब 1 करोड़ 34 लाख से अधिक का नुकसान हुआ है। स्टेशन निदेशक एपी श्रीवास्तव ने बताया कि हादसे में कितना नुकसान हुआ इसका आकलन किया जा रहा है।
जांच कमेटी 10 दिन में देगी रिपोर्ट
मालगाड़ी हादसे की जांच के लिए उच्चाधिकारियों ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। जांच कमेटी में डीएसओ आफताब अहमद, डीईएन शैलेश कुमार, डीएसटीई सुबोध राजपूत व डीएमई रजत पुरवार शामिल हैं। ये जांच कमेटी घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ साथ क्षतिग्रस्त वैगनों की जांच कर दस दिन में अपनी रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपेगी। सीपीआरओ हिमांशु शेखर ने बताया कि चार सदस्यीय जांच कमेटी दस दिन में अपने रिपोर्ट सौंपेगी।