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नया सोचें, संकल्प लें, लक्ष्य मिलने तक मेहनत करें

Sat, 26 Nov 2016 11:51 PM IST
अमर उजाला मथुरा
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वीके सिंह - फोटो : अमर उजाला
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जीएलए विश्वविद्यालय का पांचवां दीक्षांत समारोह गरिमा और उल्लास के साथ शनिवार को संपन्न हुआ। समारोह में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में 11 स्वर्ण और 11 रजत पदक के साथ 1809 उपाधियां प्रदान की गईं। 
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विश्वविद्यालय परिसर में समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि विदेश राज्य मंत्री जनरल (रिटायर्ड ) वीके सिंह, विशिष्ट अतिथि आईआईटी कानपुर के पूर्व निदेशक पद्मश्री डा. संजय गोविंद धांडे, कुलाधिपति नारायणदास अग्रवाल और कुलपति प्रोफेसर दुर्ग सिंह चौहान ने मां सरस्वती और गणेशी लाल अग्रवाल के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। 

इससे पहले कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत शैक्षिक शोभायात्रा के आगमन से हुई। इसमें मुख्य अतिथि, कुलाधिपति, कुलपति, उपकुलपति और कुलसचिव के साथ विश्वविद्यालय के एग्जीक्यूटिव काउंसिल और एकेडमिक काउंसिल के सदस्यों की अगवानी मुख्य सभागार में हुई। इसके बाद कुलाधिपति ने दीक्षांत समारोह के प्रारंभ होने की घोषणा की। 
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मुख्य अतिथि विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने छात्रों का उत्साहवर्धन किया और बधाई दी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि युवाओं की नई सोच, संकल्प के बलबूते भारत विश्व पर राज करेगा। युवा डिग्री के साथ प्रेरणा लें, लक्ष्य निर्धारित करें और नई सोच के साथ आगे बढ़ें। केवल रोजगार की चाहत न रखते हुए कुछ ऐसा भी करें कि जिससे और लोगों को भी रोजगार मिले। 

पूर्व जनरल ने छात्रों को बताया कि वो जिस स्कूल में पढ़ते थे वहां सुबह की प्रार्थना में मैथिली शरण गुप्त की कविता ‘ईश्वर हमें समर्थ बना दो...’ सुनाया जाता है। मैंने इसे अपनी प्रेरणा बनाया और छोटे से गांव से थल सेना के अध्यक्ष के पद तक का मुकाम हासिल किया। वीके सिंह बोले जिस देश के छात्र शोध करते हैं, वो देश विकास करता है। 

पद्मश्री डा. संजय गोविंद धांडे को जीएलए विश्वविद्यालय की ओर से मानद उपाधि प्रदान की गई। डॉ. संजय गोविंद धांडे ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए उच्च शिक्षा की आवश्यकता है। इसके लिए ऐसा इको सिस्टम तैयार करना होगा जिससे पूरा समाज अच्छी शिक्षा ग्रहण कर विकसित हो सके। इसके लिए गुरु और शिष्य परंपरा की आवश्यकता है। 

उन्होंने कहा कि ज्ञान भंडारण के लिए शोधकार्य, पुस्तक लेखन और पेटेंट फाइल करना चाहिए। अच्छे शोध और पेटेंट के माध्यम से ज्ञान व धन दोनों अर्जित किए जा सकते हैं। इससे पहले विश्वविद्यालय के कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने सभी का स्वागत किया। प्रतिकुलपति प्रो. एएम. अग्रवाल ने मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि का परिचय प्रस्तुत किया। कुलपति प्रो. डीएस चौहान ने विवि की प्रगति रिपोर्ट के साथ ही भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया। आभार निदेशक प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने व्यक्त किया। 
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