परिषदीय स्कूलों में मिड-डे मील के तहत सोमवार को फल वितरण किया गया। प्राथमिक विद्यालय गढ़ी परसा राया में जैसे ही बच्चों ने फल देखे उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। स्कूल में कुछ 80 बच्चे उपस्थित थे, लेकिन संस्था अक्षय पात्र की ओर से 28 केले ही उपलब्ध कराए गए। इस स्थिति में प्रधानाध्यापक राजीव पचौरी ने एक केले के तीन टुकड़े कर बच्चों में बांटे। केले का छोटा सा टुकड़ा मिलने पर बच्चे मायूस हो गए। यह स्थिति कई स्कूलों में देखने को मिली।
शासन ने परिषदीय स्कूलों के बच्चों के स्वास्थ्य के मद्देनजर मिड-डे मील के तहत फल वितरित किए जाने संबंधी आदेश अप्रैल माह में दिए थे। इसके बाद जुलाई माह में सोमवार को जिले के परिषदीय स्कूलों मेें बच्चों को फल बांटे गए।
जिले में मिड-डे मील का वितरण करने वाली संस्था अक्षय पात्र ने बेसिक के 1357 प्राथमिक और 589 पूर्व माध्यमिक विद्यालय सहित लगभग दो हजार स्कूलों में केले बांटे। मिड-डे मील के रेग्युलर मेन्यू के तहत सोमवार को सब्जी-रोटी भी दी गई।
इन विद्यालयों में भी काटकर बंटा केला
- प्राथमिक विद्यालय नगला भूरा मांट ब्लॉक में 42 बच्चों में 17 केला ही वितरित किए गए। प्रधानाध्यापक हरीनिवास ने काटकर केले बच्चों में बांटे।
- प्राइमरी विद्यालय मरहला ब्लॉक मांट में 35 बच्चों को मात्र 15 केला वितरित किए गए। प्रधानाध्यापक प्रदीप कुमार ने केला काटकर वितरित किए।
- जूनियर हाईस्कूल डहरूआ मांट में 16 बच्चों में सिर्फ सात केला ही दिए गए। यह केले भी अक्षय पात्र संस्था के कर्मचारियों ने गर्म रोटी के बर्तन में ही रख दिए। इससे पांच केले खराब हो गए। प्रधानाध्यापक दिनेश कुमार उपाध्याय ने अपनी ओर से बाजार से केले मंगाकर बच्चों में बांटे।
अलग से स्वीकृत किया गया है बजट
मिड-डे मील के तहत फल बांटने के लिए शासन ने अलग से प्रति बच्चा चार रुपये बजट स्वीकृत किया है। यह रकम सीधे जिले में मिड-डे मील का वितरण करने वाली संस्था अक्षय पात्र के खाते में ही आ रहा है। इसके तहत केवल फलों के लिए जुलाई से दिसंबर माह तक एक करोड़ चार लाख 75 हजार रुपये देने का प्रावधान है। इसमें लगभग सवा लाख बच्चों को फल वितरित करने हैं।