वृंदावन (मथुरा)। ब्रज में फाल्गुन के रंग बिखरने लगे हैं और श्री बांकेबिहारी मंदिर में होली महोत्सव की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। रंगभरनी एकादशी 10 मार्च से 13 मार्च तक आयोजित इस पर्व में ठाकुरजी की कृपा रंगों के साथ भक्तों पर बरसेगी। प्रेम और भक्ति से ओत-प्रोत इस महोत्सव में ठाकुरजी को चाट, ठंडाई और जलेबियों का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।
होली महोत्सव के दौरान ठाकुरजी अपने दिव्य शृंगार से भक्तों को मोहित करेंगे। पांच दिवसीय उत्सव में ठाकुरजी 10 बार अपनी पोशाक बदलेंगे और हर बार श्वेत वस्त्रों में अपनी दिव्य छवि से मन मोहने वाली लीलाएं करेंगे। धुलैंडी के अवसर पर श्रीबांकेबिहारी गुलाबी पोशाक में दर्शन देंगे। पीठाधीश्वर आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी के अनुसार, रंगोत्सव के पांच दिनों में ठाकुरजी को तीनों आरतियों में अलग-अलग स्वाद वाली ठंडाई का भोग लगाया जाएगा। यह दिव्य प्रसाद काजू, बादाम, अखरोट, अंजीर, मुनक्का, पिस्ता, इलायची, पोस्त, गुलकंद, दूध, क्रीम, रबड़ी और सुगंधित मसालों से तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही ठाकुरजी को चाट, दहीबड़ा और आलू की जलेबियों का भोग धराया जाएगा। संवाद
केसरिया रंग से सजेगा बिहारीजी का दरबार
रंगीली होली में ठाकुरजी के दिव्य विग्रह पर केसर, गुलाल और टेसू के फूलों का रंग अर्पित किया जाएगा। बेरीबाला परिवार की बहुजी गायत्री देवी और श्रीजी के लिए लालाजी राधेश्याम बेरीबाला ठाकुरजी के लिए केसर की कीच और चोबा टीका तैयार करेंगे। सबसे पहले सेवायतजन चांदी की पिचकारी से प्रभु पर केसर का रंग चढ़ाकर इस अलौकिक होली का श्रीगणेश करेंगे। दरबार भी केसरिया होगा।
14 को जगमोहन में विराजेंगे बिहारीजी
होली के अंतिम दिन, 14 मार्च को जब ब्रजमंडल में धुलैंडी की धूम मचेगी, तब ठाकुरजी अपने महाराज स्वरूप में जगमोहन में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। स्वर्ण-रजत सिंहासन पर विराजमान बिहारी के चारों ओर जब लाल गुलाल, टेसू के फूलों का रंग, केसर और इत्र बरसेगा तब भक्तगण जयघोष से आकाश को भेदने का काम करेंगे।
ठाकुरजी ने कंगन रखा था गिरवी
इतिहासकारों के अनुसार, यह वही अवसर है जब श्रीबांकेबिहारी ने अपने प्रिय सेवक को प्रसन्न करने के लिए स्वयं अपना स्वर्ण कंगन गिरवी रखकर दहीबड़ा का भोग स्वीकार किया था। तभी से इस पावन परंपरा में प्रभु को चाट का भोग अर्पित किया जाता है।