वृंदावन। वृंदावन शोध संस्थान में नियुक्तियों में परिवारवाद के आरोप हैं। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अनुदानित इस संस्थान में उन्हें ही नौकरी करने का मौका मिल रहा है, जिनके परिवार का सदस्य यहां पहले से कार्यरत हो या फिर वह पहले यहां अपनी सेवाएं दे चुका हो।
सामाजिक कार्यकर्ता मुकुटवल्लभ दुबे ने केंद्र सरकार को भेजे शिकायती पत्र में कहा है कि संस्थान की ओर से बाकायदा नियुक्ति के विज्ञापन का प्रकाशन, परीक्षा और साक्षात्कार जैसी प्रक्रियाएं तो अपनाई जाती हैं। बावजूद इसके तमाम आवेदनों में से नियुक्ति उन्हें ही कैसे मिलती है, जिनके आका संस्थान में दखल रखते हों या फिर जिनके परिवार का कोई सदस्य पहले से ही वहां कार्यरत हो।
अभी तक संस्थान में सहायक शोध एवं प्रकाशन अधिकारी का पद सृजित रहा है, जिस पर हाल ही में एक उम्मीदवार की नियुक्ति हुई है। बावजूद इसके एक अस्थायी कर्मचारी को नियुक्त करने की नीयत से संस्थान की परिषद की ओर से प्रस्ताव कर वरिष्ठ शोध एवं प्रकाशन अधिकारी का पद संस्थान के इतिहास में पहली दफा सृजित किया गया।
इससे संस्थान में अस्थायी रूप से कार्यरत व्यक्ति को नियुक्ति दी जा सके। सामाजिक कार्यकर्ता ने नियुक्तियों में हो रहे फर्जीवाड़े की शिकायत केंद्र एवं प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग से ही है। जरूरत पड़ी तो न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
वृंदावन शोध संस्थान में होने वाली नियुक्तियों में पूरी पारदर्शिता अपनाई जाएगी। पिछली बार हुई नियुक्ति उनके आने से पहले हो गई थी। अगर कोई शिकायत होती है नियुक्ति की जांच कराई जाएगी।
डॉ. अजय पांडेय, निदेशक वृंदावन शोध संस्थान