बीटीसी प्रशिक्षण में फर्जी सर्टिफिकेट का बड़ा खेल सामने आया है। प्रशिक्षुओं के प्रमाण पत्र सत्यापन के दौरान सोलह के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। यह सभी नेशनल इंस्टीट्यूट आफ ओपन स्कूल के नाम से जारी किए गए, जबकि ओपन स्कूल ने सर्टिफिकेट होने से इंकार कर दिया है। पहले चरण की जांच के बाद इन 16 प्रशिक्षुओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
जिले में फर्जी प्रमाण पत्रों का खेल बडे़ पैमाने पर चल रहा है। फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे कुछ पढ़ाई कर रहे हैं तो काफी संख्या में ऐसे युवा नौकरी भी पा चुके हैं। अब फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे बीटीसी करने का नया खुलासा हुआ है। अवैध सर्टिफिकेट के सहारे बीटीसी करने वाले प्रशिक्षुओं में 15 वर्ष 2013 बैच के और एक प्रशिक्षु 2014 बैच का है।
इन सभी के शैक्षिक प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए भेजे गए थे। अधिकांश प्रशिक्षु सादाबाद, मांट, महावन और राया के हैं। इनके खिलाफ फर्जी प्रमाण पत्र लगाने की तहरीर डायट प्राचार्य ने रिफाइनरी थाने में दी। मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। बताया गया है कि इस मामले में पुलिस गहनता से जांच करे तो फर्जी प्रमाणपत्रों का एक बड़ा स्कैंडल सामने आ सकता है।
फर्जी प्रमाण पत्र लगाने वाले प्रशिक्षुओं को बीटीसी प्रशिक्षण से निष्कासित कर दिया है। इनके विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
- डॉ. मुकेश अग्रवाल
प्राचार्य, डायट
टीईटी प्रमाण पत्र भी पकडे़ गए थे फर्जी
15000 शिक्षक भर्ती काउंसलिंग में भी कुछ अभ्यर्थियों ने टीईटी के फर्जी प्रमाण पत्र लगाए थे। गोपनीय शिकायत के बाद जब प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई तो 13 सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। इनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए थे लेकिन एक भी अभ्यर्थी के विरुद्ध करीब आठ माह बीतने के बाद भी बीएसए ने मुकदमा दर्ज नहीं कराया है।
प्रदेश भर के डायट में अलर्ट
नेशनल इंस्टीट्यूट आफ ओपन स्कूल के फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे बीटीसी में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या सैकड़ों में बताई जा रही है। मथुरा में खुलासा होने के बाद अब प्रदेश भर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। सूबे के सभी डायट में बीटीसी प्रशिक्षुओं के सर्टिफिकेट दोबारा से जांचने के आदेश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश में एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।