भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म दिन मनाया गया। इस दौरान एटा, फीरोजाबाद और मथुरा में उनके चित्र को भाजपा कार्यकर्ताओं ने माला पहना दी। कुछ जगह उनके चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित किए गए। इससे एक सवाल भी उठ गया कि क्या जिंदा व्यक्ति के चित्र को माला पहनाई जा सकती है। संत समाज इसे सनातन संस्कृति के अनुरूप नहीं मानता है और इसे गलत बताया है।
स्वामी महेशानंद सरस्वती ने कहा है कि हमारी संस्कृति और सभ्यता में जीवित व्यक्ति के चित्रपट पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित करने की परंपरा नहीं है। यदि किसी ने ऐसा किया है तो सनातन संस्कृति का उल्लंघन है। महंत हरिबोल बाबा ने कहा कि राजनीति में भावावेश में किया गया यह कार्य परंपरा विरोधी है। ऐसे कार्यों से समाज में गलत संदेश प्रसारित होता है।
स्वामी रामदेवानंद सरस्वती ने कहा कि अटलजी वर्तमान में अस्वस्थ हैं। उनके स्वस्थ जीवन के लिए मंगलकामनाओं के रूप में ठाकुरजी के समक्ष फूलमाला और दीप निवेदित किया जा सकता है, लेकिन उनके चित्रपट पर यह कराना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। महामंडलेश्वर नवल गिरी महाराज ने कहा कि उत्साह में किया गया यह कार्य मंगलमय नहीं हो सकता। इस प्रकार का कार्य करने वाले को यह समझना चाहिए था कि यह कार्य सम्मानीय नहीं है।