कभी पर्स में 1000 और 500 रुपये का नोट रुतबा बढ़ाता था लेकिन मंगलवार देर शाम प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद बाजार में ऐसी घबराहट फैली कि लोग बड़े नोट को भुनाने दौड़ पड़े। जिसने भी टीवी पर पीएम को सुना वहीं बाजार में दौड़ पड़ा। व्यापारियों में तो जैसे हड़कंप मच गया। हालांकि, बड़े नोटों को बदलने का वक्त दिया गया है, लेकिन बेचैन लोग तो रात में ही बड़े नोटों को खर्च करने लगे थे।
1000 और 500 रुपये का नोट बंद होने की सूचना ऐसी दौड़ी कि जरा सी देर में पूरा मथुरा जान गया। बड़े दुकानदार से लेकर खोखे वाले तक रात होते-होते खबर पहुंच गई थी। जिसके पर्स में भी बड़े नोट थे वह घबरा गए। नोट लेकर बाजार में निकल गए। लेकिन बाजार में भी इसकी जानकारी हो चुकी थी लिहाजा दुकानदार ने भी बड़े नोट लेने से साफ इंकार कर दिया। चंदनवन निवासी गौरव शर्मा ने बताया कि वह तो परेशान हो गए थे। अब यही घबराहट है कि बड़े नोटों का क्या होगा। हालांकि 30 दिसंबर तक का वक्त दिया गया है बड़े नोट बदलने के लिए।
एडवोकेट ओमवीर सारस्वत और आलोक तिवारी, राजपाल चौधरी, सुबोध चौधरी ने बताया कि लोगों को समय देना चाहिए था। बैंक वाले ही कौन से आसानी से ले लेंगे। काफी हंगामा होगा। लोग परेशान रहेंगे। विपिन गोस्वामी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने तो आठ नवंबर की रात को 12 बजे से ही नोट बंद किए हैं लेकिन बाजार में तो शाम से ही असर दिखने लगा था।
पेट्रोल पंपों पर भी बड़े नोट शाम से लेने बंद कर दिए गए थे। लोग परेशान रहे। प्रधानमंत्री की घोषणा के साथ ही घर-घर में घबराहट फैल गई थी। चिंता उस 1000 और 500 रुपये के नोट की थी जिसे बंद कर दिया गया है। गृहणी अनीता चावला का कहना है कि यह तो तानाशाही हो गई। पहले लोगों को वक्त देना चाहिए था। ये कौन सी बात हो गई कि आदेश जारी कर दिया।