कैप्टिव हथनी के रूप में उसे मंदिरों के बाहर भिक्षा मांगने के लिए मजबूर किया जाता था। मुंबई की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर चलते हुए उसके नाजुक पैरों में काफी चोट आईं। उसके आहार में मुख्य रूप से मिठाइयां और तले हुए खाद्य पदार्थ शामिल थे। इससे उसका मोटापा काफी बढ़ गया था।
लक्ष्मी को लोग सड़क पर वड़ा पाव खिलाते थे। खानपान खराब होने की वजह से वह मुश्किल से बिना किसी सहारे के खड़ी हो पाती थी। इस कारण उसका वजन लगभग 1800 किलोग्राम अधिक था। इसके परिणामस्वरूप उसे गंभीर ऑस्टियो आर्थराइटिस और शरीर के अंगों में दर्द होने लगा था।
यह भी पढ़ेंः- मनचले समीर का दुस्साहस: बीच सड़क युवती पर केमिकल फेंकने की कोशिश, बस का शीशा तोड़ा, बजरंगियों ने किया हंगामा
2013 में लक्ष्मी को मुंबई से रेस्क्यू किया गया। यह समय उसके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। वाइल्डलाइफ एसओएस के हस्तक्षेप के बाद उसे हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र लाया गया। उस समय उसका वजन लगभग 5,000 किलोग्राम था। इसे कम करना वाइल्डलाइफ एसओएस के पशु चिकित्सकों और देखभाल करने वालों की समर्पित टीम का उद्देश्य था।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि, 'लक्ष्मी का परिवर्तन जहां एक उत्साह का कारण है, वहीं यह जागरूकता और कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है। उसकी कहानी पीड़ा और शोषण के जीवन में मजबूर भीख मांगने वाले हाथियों की दुर्दशा पर प्रकाश डालती है। वाइल्डलाइफ एसओएस कैद में मजबूर हाथियों को बचाने और पुनर्वास करने के अपने मिशन के लिए प्रतिबद्ध है।