निधिवनराज मंदिर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बृहस्पतिवार को दर्शन करेंगी। वह स्वतंत्र भारत की पहली राष्ट्रपति होंगी जो निधिवनराज की इस सिद्धभूमि पर पहुंचेंगी। इससे पूर्व भले ही तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, प्रणव मुखर्जी और रामनाथ कोविंद श्रीबांकेबिहारी मंदिर पहुंच चुके हैं, लेकिन किसी ने भी निधिवन के दर्शन नहीं किए। वहीं, तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह वृंदावन तो आए, लेकिन बांकेबिहारी और निधिवन नहीं जा पाए। उन्होंने रंगजी मंदिर में दर्शन किए थे।
राष्ट्रपति मुर्मू देश की चौथी राष्ट्रपति होंगी जो श्रीबांकेबिहारी मंदिर पहुंचेंगी और साथ ही निधिवनराज के दर्शन करने वाली प्रथम महामहिम बनकर एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी भी बनेंगी। इसको लेकर सेवायतों, गोस्वामी समाज और वृंदावनवासियों में उत्साह है।
इतिहासकार आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी के अनुसार निधिवन वृंदावन का एक प्राचीनतम सिद्ध स्थल है जो लगभग तीन एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यह स्थल रसिक शेखर श्री स्वामी हरिदास जी महाराज की साधनास्थली रहा है, जिनके संगीत साधना से प्रसन्न होकर श्री बांकेबिहारीजी महाराज ने स्वयं प्रकट होकर दर्शन दिए थे।
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