राजीव भवन शुक्रवार को अधिवक्ताओं और कर्मचारियों के बीच अखाड़ा बन गया। दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई। अधिवक्ताओं के आक्रोश को देख अफसर और कर्मचारी खुद को बचाने के लिए इधर से उधर दौड़ते नजर आए। पुलिस की भी सांसें फूल गईं।
विवाद की शुरुआत पूर्वाह्न करीब 11 बजे हुई। अधिवक्ता नरेन्द्र शर्मा किसी काम के संबंध में राजीव भवन स्थित समाज कल्याण विभाग कार्यालय गए थे। यहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कांता से उनका एक दस्तावेज की फोटो स्टेट कराने के मुद्दे पर विवाद हो गया। दोनों में मारपीट हो गई। कर्मचारी एकत्रित हुए और अधिवक्ता की पिटाई कर डाली।
तब तो नरेन्द्र शर्मा चले गए लेकिन थोड़ी देर बाद बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के साथ राजीव भवन पहुंच गए। सभी ने राजीव भवन को घेर लिया। सूचना पर एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी, सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी, एसओ सदर, कोतवाली प्रभारी और आसपास के थानों से पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गया।
अधिवक्ताओं को राजीव भवन में घुसने से रोकने के लिए गेट चैनल को बंद कर दिया गया। लेकिन 20 से 25 की संख्या में अधिवक्ता राजीव भवन में घुस गए। उन्होंने कर्मचारियों के साथ मारपीट करने का प्रयास किया। हंगामा किया। यह स्थिति देख राजीव भवन के कर्मचारियों में भगदड़ मच गई। आरोप है कि जिला समाज कल्याण अधिकारी से भी अभद्रता की गई।
दो घंटे तक राजीव भवन में हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। पुलिस ने जैसे-तैसे वकीलों को समझाकर शांत कराए। एसपी सिटी ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। मामले में अधिवक्ता नरेश शर्मा की तहरीर पर समाज कल्याण विभाग के अधिकारी उमाशंकर शर्मा, कर्मचारी कांता प्रसाद, कन्हैया और मनीष के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट थाना सदर बाजार में दर्ज की गई है। शाम को कर्मचारियों की ओर से भी अधिवक्ता और अन्य के खिलाफ तहरीर सदर पुलिस को दी गई है।