वृंदावन। धीरेंद्र शास्त्री और सनातनियों द्वारा बांकेबिहारी के दर्शन के बाद बागेश्वर धाम-बांकेबिहारी मिलन पदयात्रा को विराम दिया गया। शाम को श्रीबांकेबिहारी मंदिर पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री ने दर्शन करने के बाद ठाकुरजी की चरण पादुका की इत्र सेवा की। उन्होंने सेवायतों से कहा कि अपने आराध्य के दर्शन करने के बाद वह धन्य हो गए। बालाजी की कृपा से यह सबकुछ संभव हुआ है।
150 किमी की सनातन हिंदू एकता पदयात्रा के समापन के दिन धीरेंद्र शास्त्री चारधाम मंदिर से संतों संग पदयात्रा करते हुए मंदिर तक पहुंचे। उनके आगमन से पूर्व मंदिर में पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी पहुंच गए थे। मंदिर में गेट नंबर एक से प्रवेश करने के बाद धीरेंद्र शास्त्री का सेवायतों ने स्वागत किया। मंदिर से निकलने के बाद गलियाें में लोगों ने उनके ऊपर पुष्प वर्षा भी की। मंदिर में उनके साथ पुंडरीक गोस्वामी, इंद्रेश महाराज, रोहित रिछारिया, दिनेश गोस्वामी आदि मौजूद रहे।
धीरेंद्र शास्त्री को सौंपा पत्र
श्री बांकेबिहारी जी मंदिर में दर्शन करने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को बिहारी मंदिर कॉरिडोर और अधिग्रहण के मामले में स्थानीय पीड़ित ने एक व्यथा पत्र दिया। व्यथा पत्र के माध्यम से कांग्रेस नेता दीपक पाराशर ने महाराज जी से पूछा कि यह सरकार सनातनी हिंदुओं के विश्वविख्यात बिहारीजी मंदिर का अधिग्रहण कर रही है और कॉरिडोर के नाम पर सैकड़ों प्राचीन मंदिरों को तोड़ रही है और आप चुप हैं। यह कैसा सनातन है? इस पर उन्होंने आश्वासन दिया कि वह इस पर विचार करेंगे।