मंदिर परिसर और बाहर रहा भीड़ का दबाव
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ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज को मंदिर सेवायतों ने विगत दिनों से तैयार किए जा रहे चंदन श्रंगार में चंदन के साथ केसर, कर्पूर का लेप लगाकर ठंडक का अहसास कराया। देश और विदेशों से आए श्रद्धालु ठाकुरजी के चंदन प्रसाद को लेकर अपने को धन्य मान रहे थे। दोपहर 12 बजे राज भोग आरती से पहले मंदिर परिसर और मंदिर के बाहर भीड़ का दबाव इतना बढ़ा कि विद्यापीठ चौराहे पर लगाई गई बैरिकेडिंग ध्वस्त हो गई। यहां तैनात पुलिसकर्मियों ने भीड़ के दबाव को संभाला।
मंदिर में सुरक्षा के रहे इंतजाम
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में सुरक्षा के लिए भारी पुलिसबल तैनात किया गया। सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद, माला और सामान की तलाशी के बाद ही अंदर जाने दिया गया। इसके साथ ही नगर के प्रमुख मंदिरों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रहे।
ठंडाई के साथ केसरिया छेना, खीर का लगाया प्रसाद
ठाकुर बांकेबिहारी को गर्मी से राहत देने के लिए शीतल पदार्थों का प्रसाद निवेदित किया गया। ठाकुरजी को सत्तू, खरबूजा, मेवा युक्त ठंडाई के अलावा केसरिया छैना खीर, ककड़ी और शर्बत का प्रसाद लगाया गया। शाम के समय भी भगवान के सर्वांग दर्शन हुए। इस दौरान बांकेबिहारीजी के चरणों में चंदन से बना लड्डू अर्पित किया।
गर्मी में परेशान श्रद्धालुओं को पानी पिलाते इंस्पेक्टर
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बांकेबिहारी को धारण की पायजेब
बांकेबिहारी को पायजेब भी धारण कराई गई। भक्तों ने सेवायतों के माध्यम से ठाकुरजी को सोने और चांदी की पायजेब धारण कराई। मंदिर सेवायत श्रीनाथ गोस्वामी ने बताया कि इस दिन विवाह योग्य युवतियां भगवान बांकेबिहारी को पायजेब अर्पित करती हैं और अपने सुखी विवाहित जीवन की कामना करती हैं। इधर अक्षय तृतीय पर्व पर अक्षय पुण्य प्राप्ति की कामना से विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा नगर में विभिन्न स्थानों पर शीतल जल एवं शर्बत की प्याऊ लगाई गईं।
तमाम कष्ट सहकर भी पहुंचे आराध्य के दर्शन के लिए
बांकेबिहारी के दर्शन के लिए आए भक्तों ने कष्टों को दरकिनार कर आराध्य के दर्शन किए। पंजाब से आए सोन और रेनू ढाई घंटे तक लाइन में लगकर ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन के लिए पहुंचे और कृतार्थ हुए। वहीं अलवर की रहने वाली माया और शिल्पी गुप्ता सुबह 10 बजे लाइन में लगीं, लेकिन जब तक वह मंदिर के गेट तक पहुंचीं 12 बजे की आरती के बाद दर्शन बंद हो गए। दोनों निराश थीं, लेकिन आराध्य के प्रति उनकी श्रद्धा देखिए शाम तीन बजे से बांकेबिहारी के दर्शन के लिए लाइन में लग गईं बाद में उन्हें ठाकुरजी के दर्शन मिले।