हाईवे को सिक्सलेन करने में आ रही बाधाओं को हटाने के लिए मंगलवार को चौमुंहा में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। मकानों-दुकानों को जेसीबी से ढहा दिया गया।
इस दौरान कई बार हंगामा भी हुआ। हाईवे के चौड़ीकरण के लिए अधिगृहीत की गई जमीन का मुआवजा नहीं मिलने के मुद्दे पर लोगों ने विरोध जताया लेकिन बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के चलते हालात काबू से बाहर नहीं हुए।
एसडीएम रामअरज यादव, सीओ छाता पीयूष कुमार, सीओ सदर आरके गौतम की मौजूदगी में ये अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया।
जेसीबी मशीन को देखकर कुछ लोग तो स्वयं ही मकानों को तोड़ने लग गए। बहुत से लोग अपने मकानों और दुकानों से सामान निकालने लगे। जेसीबी मशीन एक के बाद एक मकान और दुकानें ध्वस्त करती गई।
इस मौके पर राजमार्ग प्राधिकरण के टेक्निकल मैनेजर यशपाल सिंह जादौन, रिलायंस से दिनेश पटेल, एलएंडटी के कई अधिकारी मौजूद रहे।
‘बिना मुआवजे मकान तोड़ा, तो आत्मदाह कर लूंगा’
मुआवजे की मांग को लेकर केरोसिन की कट्टी लेकर छत पर चढ़ा युवक
चौमुंहा। जेसीबी जब चौमुंहा के मुख्य चौराहे पर स्थित टीटू पुत्र जसराम के मकान को तोड़ने पहुंची तो पूरा परिवार केरोसिन लेकर मकान की छत पर चढ़ गया। बिना मुआवजा मिले मकान तोड़ने पर आत्मदाह की धमकी दी।
टीटू का कहना था कि जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक वह अपने घर की तोड़फोड़ नहीं होने देगा। यदि प्रशासन ने बलपूर्वक तोड़फोड़ की तो वह परिवार सहित आत्मदाह कर लेगा। आखिर प्रशासन को अभियान रोकना पड़ा।
मुआवजा भी नहीं मिला और घर भी चला गया
चौमुंहा। अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद मौके पर नजारा विचलित करने वाला रहा। कई जगह लोग रो रहे थे। कई ने बताया कि उनको मुआवजा भी नहीं मिला और अब घर-दुकान भी चली गई।
जगदीश पंडित ने बताया वह अपनी पुश्तैनी जमीन पर कई वर्ष से दुकान चला रहे थे। जमीन अधिग्रहण के बाद अभी तक मुआवजा नहीं मिला। चक्कर लगाते-लगाते वह थक गए।
प्रशासन ने उनका रोजगार और घर दोनों छीन लिए। विमलेश के आंसू नहीं रुक रहे थे, उनका सामान भी मलबे के नीचे दब गया था। बोलीं कि वह अधिकारियों के पैरों में पड़कर घर का सामान निकालने की गुहार लगाती रहीं लेकिन उनकी एक न सुनी गई।
दवा-पानी के लिए भटके लोग
हाईवे किनारे बनी दुकानें ध्वस्त किए जाने से कई वस्तुओं के लिए लोगों को परेशान होना पड़ा। दवाइयों, चाय, पानी के लिए लोगों को अंदर बाजार तक जाना पड़ा।
सभी को मुआवजा मिल चुका है। कुछ लोग स्वेच्छा से मुआवजा लेने नहीं पहुंचे हैं। मुआवजा केवल उन्हीं लोगों का रोका गया है जिनकी जमीन विवादित है या जिस जमीन पर कोर्ट में वाद दायर है।
-रामअरज यादव, एसडीएम छाता