गर्भवती को हास्पिटल ले जाने को सरकारी एंबुलेंस के लिए परिवारीजन दो घंटे तक इंतजार करते रहे। एंबुलेंस नहीं आई तो दर्द से कराहती महिला को हास्पिटल ले जाने के लिए किराए पर वाहन किया गया। लेकिन जब तक परिवारीजन हास्पिटल पहुंचे गाड़ी में बच्चे का जन्म हो गया था। अब जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिलने की बात कही जा रही है।
गांव दौलतपुर निवासी अरशद की पत्नी सहरूना को सोमवार सुबह से ही प्रसव पीड़ा चल रही थी। गांव की आशा मीरा और परिवारीजनों ने सरकारी एंबुलेंस के लिए कंट्रोल रूम सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर फोन किया। आशा और अरशद ने बताया कि करीब दो घंटे तक इंतजार करने पर भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। इस पर वह निजी गाड़ी लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आए।
दानघाटी मंदिर के सामने जाम में भी कुछ देर के लिए गाड़ी फंस गई। जब तक स्वास्थ्य केंद्र के दरवाजे पर पहुंचे बच्चे का जन्म हो गया। आशा के अनुसार बच्चे का नार स्वास्थ्य केंद्र की नर्सों ने काटी और जच्चा-बच्चा को भर्ती कर लिया। परिवारीजनों के अनुसार अब उनको जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाला लाभ नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नर्स ने इसके लिए पांच सौ रुपये की मांग की। पैसे न देने पर स्टाफ नर्स ने उनके कागज फेंक दिया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा. मुनीष पौरुष ने बताया कि डिलीवरी निजी वाहन में रास्ते में हुई है जिसके चलते जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल सकता। सरकारी एंबुलेंस के पहुंचने में देरी और जाम में फंसने के मुद्दे पर उनका कहना था कि दोनों ही उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर की बातें हैं।